#Introduction
अध्याय 4 : लोकोक्तियाँ
1. परिचय
हिंदी भाषा की समृद्धि और लोक-संस्कृति की गहराई का परिचायक तत्व है – लोकोक्ति। ‘लोकोक्ति’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘लोक’ + ‘उक्ति’। अर्थात् वह उक्ति (कथन) जो लोक में प्रचलित हो, लोकोक्ति कहलाती है।
लोकोक्तियाँ अनुभव, जीवन-दर्शन, व्यवहारिक ज्ञान और सामाजिक सत्य का संक्षिप्त रूप होती हैं। ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक परंपरा से चली आती हैं और जीवन के सत्य को अत्यंत सरल, प्रभावशाली और चित्रात्मक रूप में प्रस्तुत करती हैं।
लोकोक्ति की परिभाषा
वे पूर्ण वाक्य जो लोक-अनुभव पर आधारित हों, किसी जीवन-सत्य या शिक्षा को संक्षिप्त और प्रभावपूर्ण ढंग से व्यक्त करें, लोकोक्ति कहलाती हैं।
उदाहरण
- जैसा करोगे वैसा भरोगे।
- देर आए दुरुस्त आए।
- नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- ऊँट के मुँह में जीरा।
- घर का भेदी लंका ढाए।
लोकोक्ति की विशेषताएँ
- यह पूर्ण वाक्य होती है।
- जीवन के अनुभव पर आधारित होती है।
- शिक्षाप्रद और सारगर्भित होती है।
- संक्षिप्त परंतु गहन अर्थ वाली होती है।
- भाषा को प्रभावशाली बनाती है।
लोकोक्ति और मुहावरे में अंतर
| मुहावरा | लोकोक्ति |
|---|---|
| वाक्यांश होता है | पूर्ण वाक्य होता है |
| वाक्य के भीतर प्रयोग | स्वतंत्र प्रयोग |
| भावार्थ प्रधान | जीवन-सत्य प्रधान |
| जैसे – नाक कटना | जैसे – जैसा करोगे वैसा भरोगे |
लोकोक्ति का महत्व
लोकोक्तियाँ समाज की सामूहिक बुद्धि का प्रतिनिधित्व करती हैं। ये व्यक्ति को व्यवहारिक ज्ञान देती हैं, नैतिक शिक्षा प्रदान करती हैं और भाषा को अधिक प्रभावशाली बनाती हैं। परीक्षाओं में लोकोक्तियाँ विशेष महत्व रखती हैं क्योंकि इनसे संबंधित प्रश्न अक्सर अर्थ, प्रयोग, मिलान, वाक्य निर्माण और रिक्त स्थान के रूप में पूछे जाते हैं।
अतः लोकोक्तियों का अध्ययन न केवल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन-व्यवहार की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी है।
#Structure and Type
2. संरचना व प्रकार
लोकोक्तियाँ भाषा की परिपक्व अभिव्यक्ति हैं। ये केवल वाक्य नहीं, बल्कि लोक-अनुभव, सामाजिक व्यवहार, नैतिक शिक्षा और जीवन-दर्शन का सार होती हैं। इनकी संरचना सरल दिखती है, परंतु इनके भीतर गहन अर्थ निहित रहता है। लोकोक्तियाँ पूर्ण वाक्य होती हैं और स्वतंत्र रूप से प्रयोग की जाती हैं।
लोकोक्तियों की संरचना
लोकोक्तियों की संरचना सामान्यतः निम्नलिखित विशेषताओं पर आधारित होती है:
- पूर्ण वाक्य संरचना
- संक्षिप्त और प्रभावपूर्ण भाषा
- तुकांत या लयात्मकता
- चित्रात्मकता
- अनुभव आधारित कथन
1. पूर्ण वाक्य संरचना
लोकोक्ति सदैव पूर्ण वाक्य होती है। इसमें कर्ता, क्रिया और भाव स्पष्ट रूप से निहित रहते हैं।
उदाहरण:
- जैसा करोगे वैसा भरोगे।
- देर आए दुरुस्त आए।
- घर का भेदी लंका ढाए।
2. संक्षिप्तता
लोकोक्तियाँ छोटी होती हैं, परंतु इनमें जीवन का गहरा अनुभव छिपा होता है।
उदाहरण:
- अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
- नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
3. तुकांत या लयात्मकता
कई लोकोक्तियों में लयात्मकता होती है जिससे वे स्मरणीय बन जाती हैं।
उदाहरण:
- जैसी करनी वैसी भरनी।
- दूर के ढोल सुहावने।
4. चित्रात्मकता
लोकोक्तियाँ दृश्य चित्र प्रस्तुत करती हैं।
उदाहरण:
- ऊँट के मुँह में जीरा।
- एक अनार सौ बीमार।
5. अनुभव आधारित कथन
ये लोक-अनुभव पर आधारित होती हैं और पीढ़ियों से प्रचलित हैं।
लोकोक्तियों के प्रकार
1. नैतिक शिक्षा संबंधी लोकोक्तियाँ
जो लोकोक्तियाँ नैतिक संदेश देती हैं।
- जैसा करोगे वैसा भरोगे।
- साँच को आँच नहीं।
- देर आए दुरुस्त आए।
2. अनुभव आधारित लोकोक्तियाँ
- अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
- दूध का जला छाछ भी फूँककर पीता है।
3. व्यंग्यात्मक लोकोक्तियाँ
- नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- ऊँची दुकान फीका पकवान।
4. सामाजिक व्यवहार संबंधी लोकोक्तियाँ
- घर का भेदी लंका ढाए।
- एकता में बल है।
5. परिश्रम संबंधी लोकोक्तियाँ
- मेहनत का फल मीठा होता है।
- बूंद-बूंद से सागर भरता है।
6. समय संबंधी लोकोक्तियाँ
- समय बड़ा बलवान।
- काल करे सो आज कर।
7. भाग्य संबंधी लोकोक्तियाँ
- जिसकी लाठी उसकी भैंस।
- भाग्य बलवान तो पत्थर भी पूजित।
8. सावधानी संबंधी लोकोक्तियाँ
- सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।
- दूध का जला छाछ भी फूँककर पीता है।
निष्कर्ष
लोकोक्तियाँ भाषा की आत्मा हैं। इनकी संरचना सरल होते हुए भी गहन होती है। ये समाज के अनुभव, ज्ञान और नैतिक मूल्यों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करती हैं। परीक्षाओं में इनसे संबंधित प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। अतः इनके प्रकार, अर्थ और प्रयोग का सम्यक अध्ययन आवश्यक है।
#Rules and Formulae
3. नियम व सूत्र
लोकोक्तियों का प्रयोग भाषा को प्रभावशाली और सारगर्भित बनाता है। परंतु इनके प्रयोग में सावधानी आवश्यक है, क्योंकि लोकोक्तियाँ पूर्ण वाक्य होती हैं और इनका अर्थ सामान्य शब्दार्थ से भिन्न होता है। परीक्षाओं में लोकोक्तियों से संबंधित प्रश्न प्रायः अर्थ, प्रयोग, वाक्य निर्माण, मिलान और रिक्त स्थान के रूप में पूछे जाते हैं।
1. लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है
लोकोक्ति स्वयं में पूर्ण वाक्य होती है। इसे वाक्य के भीतर किसी शब्द की तरह नहीं जोड़ा जाता।
सही प्रयोग: वह अपनी गलती के लिए दूसरों को दोष देता है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
गलत प्रयोग: वह आँगन टेढ़ा कर रहा है। ❌
2. शब्द परिवर्तन नहीं किया जा सकता
लोकोक्तियाँ स्थिर रूप में प्रयोग की जाती हैं। इनके शब्दों में परिवर्तन करने से अर्थ बिगड़ जाता है।
सही: देर आए दुरुस्त आए।
गलत: देर से आए तो अच्छा आए। ❌
3. भावार्थ समझकर प्रयोग करें
लोकोक्ति का प्रयोग उसके भावार्थ के अनुसार होना चाहिए।
उदाहरण:
- जब कोई देर से सुधार करता है – देर आए दुरुस्त आए।
- जब कोई गलती के बाद पछताता है – अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
4. स्वतंत्र प्रयोग का नियम
लोकोक्ति सामान्यतः स्वतंत्र वाक्य के रूप में प्रयुक्त होती है।
उदाहरण:
उसने समय रहते पढ़ाई नहीं की और अब असफल हो गया। अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
5. प्रसंगानुकूल प्रयोग
लोकोक्ति का प्रयोग प्रसंग के अनुसार होना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति अपनी कमी स्वीकार नहीं करता और दूसरों को दोष देता है, तो – नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
6. मुहावरे से अंतर समझना आवश्यक
| मुहावरा | लोकोक्ति |
|---|---|
| वाक्यांश | पूर्ण वाक्य |
| वाक्य में समाहित | स्वतंत्र प्रयोग |
| जैसे – नाक कटना | जैसे – जैसा करोगे वैसा भरोगे |
7. तर्कसंगत प्रयोग
लोकोक्ति का प्रयोग तर्कपूर्ण होना चाहिए।
यदि कोई बिना परिश्रम सफलता चाहता है, तो कहना उचित होगा — मेहनत का फल मीठा होता है।
8. पुनरावृत्ति से बचें
एक ही अनुच्छेद में बार-बार लोकोक्तियों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
9. परीक्षा में उत्तर लिखते समय सावधानी
- शुद्ध वर्तनी लिखें।
- पूरा वाक्य लिखें।
- शब्द न बदलें।
- सही प्रसंग दें।
10. सूत्र रूप में नियम
- लोकोक्ति = लोक + उक्ति
- पूर्ण वाक्य
- स्थिर रूप
- जीवन अनुभव आधारित
- प्रसंगानुकूल प्रयोग
निष्कर्ष
लोकोक्तियों का प्रयोग भाषा की परिपक्वता का परिचायक है। इनके प्रयोग में सावधानी, शुद्धता और प्रसंग की उपयुक्तता आवश्यक है। परीक्षाओं में इनसे संबंधित प्रश्नों के लिए अर्थ, प्रकार और सही प्रयोग का अभ्यास अनिवार्य है।
#Examples
4. लोकोक्तियाँ – उदाहरण
- अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। – समय निकल जाने पर पछताना व्यर्थ है।
- जैसा करोगे वैसा भरोगे। – कर्म के अनुसार फल मिलता है।
- देर आए दुरुस्त आए। – देर से सुधार होना भी अच्छा है।
- नाच न जाने आँगन टेढ़ा। – अपनी कमी दूसरों पर डालना।
- घर का भेदी लंका ढाए। – अपना ही व्यक्ति नुकसान पहुँचाता है।
- दूध का जला छाछ भी फूँककर पीता है। – एक बार ठगा गया व्यक्ति सावधान रहता है।
- ऊँट के मुँह में जीरा। – आवश्यकता से बहुत कम।
- एक अनार सौ बीमार। – वस्तु कम और चाहने वाले अधिक।
- साँच को आँच नहीं। – सत्य कभी पराजित नहीं होता।
- मेहनत का फल मीठा होता है। – परिश्रम का परिणाम अच्छा होता है।
- काल करे सो आज कर। – कार्य को टालना नहीं चाहिए।
- दूर के ढोल सुहावने। – दूर की वस्तु अच्छी लगती है।
- जैसी करनी वैसी भरनी। – कर्म का फल अवश्य मिलता है।
- अधजल गगरी छलकत जाए। – कम ज्ञान वाला अधिक दिखावा करता है।
- बूंद-बूंद से सागर भरता है। – छोटी-छोटी बचत से बड़ा परिणाम।
- जिसकी लाठी उसकी भैंस। – शक्तिशाली का अधिकार चलता है।
- न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी। – कारण समाप्त तो परिणाम भी समाप्त।
- ऊँची दुकान फीका पकवान। – दिखावा अधिक, गुणवत्ता कम।
- एकता में बल है। – मिलजुल कर रहने से शक्ति मिलती है।
- चोर की दाढ़ी में तिनका। – दोषी व्यक्ति स्वयं घबराता है।
- आम के आम गुठलियों के दाम। – दोहरा लाभ।
- नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। – पाप करने के बाद ढोंग करना।
- जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय। – ईश्वर रक्षा करे तो कोई हानि नहीं।
- लालच बुरी बला है। – लालच से नुकसान होता है।
- अंधों में काना राजा। – मूर्खों में थोड़ा ज्ञानी श्रेष्ठ।
- जहाँ चाह वहाँ राह। – इच्छा हो तो मार्ग मिल जाता है।
- एक हाथ से ताली नहीं बजती। – झगड़े में दोनों की गलती होती है।
- खाली बर्तन अधिक बजते हैं। – अज्ञानी अधिक शोर करता है।
- हाथ कंगन को आरसी क्या। – प्रत्यक्ष प्रमाण की आवश्यकता नहीं।
- बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद। – अयोग्य व्यक्ति मूल्य नहीं समझता।
- निंदक नियरे राखिए। – आलोचक लाभकारी होता है।
- अति सर्वत्र वर्जयेत्। – किसी भी चीज़ की अति बुरी है।
- सावधानी हटी दुर्घटना घटी। – लापरवाही से हानि होती है।
- लोहे को लोहा काटता है। – शक्तिशाली को शक्तिशाली ही रोक सकता है।
- जंगल में मोर नाचा किसने देखा। – बिना प्रचार के प्रतिभा व्यर्थ।
- घर की मुर्गी दाल बराबर। – अपनी वस्तु का मूल्य कम आँकना।
- न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी। – मूल कारण हटाओ, समस्या समाप्त।
- एक मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है। – एक बुरा व्यक्ति सबको बदनाम करता है।
- अंधा क्या चाहे दो आँखें। – आवश्यकता अनुसार इच्छा।
- सौ सुनार की एक लुहार की। – एक प्रभावशाली वार पर्याप्त।
- नाम बड़े और दर्शन छोटे। – दिखावा अधिक, कार्य कम।
- जाके पैर न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई। – जिसने कष्ट न सहा वह दर्द नहीं समझता।
- चोर-चोर मौसेरे भाई। – बुरे लोग आपस में मिले रहते हैं।
- थोथा चना बाजे घना। – कम ज्ञान वाला अधिक बोलता है।
- समय बड़ा बलवान। – समय की शक्ति सर्वोपरि है।
- रात गई बात गई। – पुरानी बात भूल जानी चाहिए।
- जो गरजते हैं वे बरसते नहीं। – धमकी देने वाले कम कार्य करते हैं।
- ऊँट पहाड़ के नीचे। – घमंड टूट जाना।
- एक पंथ दो काज। – एक कार्य से दो लाभ।
- खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान। – भाग्य अच्छा हो तो सफलता मिलती है।
- खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे। – हारने वाला व्यर्थ क्रोध करता है।
- जब जागो तभी सवेरा। – सुधार कभी भी संभव है।
- अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता। – अकेले से बड़ा काम नहीं होता।
- मन चंगा तो कठौती में गंगा। – शुद्ध मन सबसे बड़ा।
- जितनी चादर हो उतने ही पैर फैलाओ। – आय के अनुसार खर्च करो।
- जैसी करनी वैसी भरनी। – कर्मफल सिद्धांत।
- भैंस के आगे बीन बजाना। – मूर्ख को समझाना व्यर्थ।
- घर फूँक तमाशा देखना। – अपना नुकसान कर आनंद लेना।
- दूध का दूध पानी का पानी। – न्याय करना।
- जैसा देश वैसा भेष। – स्थान अनुसार व्यवहार।
- जहाँ चार बर्तन होते हैं वहाँ खटपट होती है। – साथ रहने पर मतभेद स्वाभाविक।
- काला अक्षर भैंस बराबर। – बिल्कुल अशिक्षित।
- नौ दिन चले अढ़ाई कोस। – धीमी प्रगति।
- बिल्ली के भाग से छींका टूटा। – अचानक लाभ।
- जैसा बोओगे वैसा काटोगे। – कर्म के अनुसार फल।
- अपना हाथ जगन्नाथ। – आत्मनिर्भरता श्रेष्ठ।
- ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर। – जोखिम उठाया तो परिणाम स्वीकार।
- कर्म ही पूजा है। – कार्य सर्वोपरि।
- कोयले की दलाली में मुँह काला। – बुरे काम से बदनामी।
- जितनी लाठी उतनी भैंस। – शक्ति के अनुसार अधिकार।
- जिसकी लाठी उसकी भैंस। – शक्तिशाली का अधिकार।
- आसमान से गिरे खजूर में अटके। – एक संकट से दूसरे में फँसना।
- एक और एक ग्यारह। – एकता में शक्ति।
- ऊँची दुकान फीका पकवान। – दिखावा अधिक गुणवत्ता कम।
- आगे कुआँ पीछे खाई। – दोनों ओर संकट।
- घर का जोगी जोगड़ा। – अपने की उपेक्षा।
- खोदा पहाड़ निकली चुहिया। – अधिक प्रयास कम परिणाम।
- आम के आम गुठलियों के दाम। – दोहरा लाभ।
- आसमान सिर पर उठाना। – अत्यधिक शोर करना।
- एक तीर से दो शिकार। – एक प्रयास दो परिणाम।
- जहाँ धुआँ है वहाँ आग है। – संदेह का कारण होता है।
- बूँद से गई वह हौज से नहीं आती। – छोटी गलती बड़ा नुकसान।
- जैसा राजा वैसी प्रजा। – नेता जैसा जनता वैसी।
- नाम कमाओ काम से। – कर्म से प्रतिष्ठा मिलती है।
- बिन मेहनत फल नहीं। – परिश्रम आवश्यक।
- लालच का फल बुरा। – लालच हानिकारक।
- एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा। – बुराई पर बुराई।
- अपनी ढपली अपना राग। – स्वार्थी व्यवहार।
- जैसे को तैसा। – समान व्यवहार का प्रत्युत्तर।
- अंत भला तो सब भला। – परिणाम अच्छा हो तो सब अच्छा।
- अंधेर नगरी चौपट राजा। – जहाँ शासन व्यवस्था खराब हो।
- एक ही थाली के चट्टे-बट्टे। – समान स्वभाव वाले लोग।
- ऊँट के पाँव में सबका पाँव। – बड़े में छोटों का समावेश।
- गागर में सागर। – कम शब्दों में अधिक अर्थ।
- घर बैठे गंगा आना। – बिना प्रयास लाभ मिलना।
- चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए। – अत्यधिक कंजूस होना।
- चिता से चिंता बड़ी। – चिंता अधिक कष्ट देती है।
- छोटे मुँह बड़ी बात। – क्षमता से अधिक बोलना।
- जल में रहकर मगर से बैर। – शक्तिशाली से शत्रुता करना।
- जैसे को तैसा मिलना। – समान व्यवहार प्राप्त होना।
- जहाँ सुमति तहाँ संपत्ति। – सद्बुद्धि से समृद्धि।
- जाके सिर मोर मुकुट सो क्या करे पगड़ी। – महान के सामने छोटा महत्वहीन।
- जाको प्रिय न राम वैदेही। – दुष्ट व्यक्ति भलाई नहीं समझता।
- जिसकी करनी उसी की भरनी। – कर्मफल सिद्धांत।
- जीवन है तो जहान है। – प्राण सर्वोपरि हैं।
- ढाक के तीन पात। – कोई परिवर्तन नहीं।
- तू डाल-डाल मैं पात-पात। – चालाकी में आगे होना।
- थोड़ी सी चिंगारी बड़ा वन जला देती है। – छोटी बात बड़ा विवाद।
- दाने-दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम। – भाग्य अनुसार प्राप्ति।
- देर की लेकिन अंधेर नहीं। – न्याय देर से पर अवश्य होता है।
- न घर का न घाट का। – कहीं का न रहना।
- निंदक घर में राखिए। – आलोचना से सुधार।
- नौ दिन चले अढ़ाई कोस। – अत्यंत धीमी प्रगति।
- पाप का घड़ा भरता है। – बुराई का परिणाम अवश्य मिलता है।
- पल में तोला पल में माशा। – चंचल स्वभाव।
- पूत कपूत तो क्यों धन संचय। – दुष्ट संतान पर धन व्यर्थ।
- बंदर के हाथ में उस्तरा। – अयोग्य को अधिकार।
- बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय। – जैसा कर्म वैसा फल।
- भेड़ चाल चलना। – अंधानुकरण।
- मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। – आत्मविश्वास महत्वपूर्ण।
- मुँह में राम बगल में छुरी। – कपटी व्यक्ति।
- यथा राजा तथा प्रजा। – नेतृत्व का प्रभाव।
- राई का पहाड़ बनाना। – छोटी बात को बड़ा करना।
- लाठी के बल भैंस। – बल से अधिकार।
- लोभ में हानि। – लालच से नुकसान।
- विनाश काले विपरीत बुद्धि। – संकट के समय गलत निर्णय।
- शेर की एक दिन की जिंदगी गीदड़ की सौ साल से अच्छी। – सम्मानजनक जीवन श्रेष्ठ।
- सिर मुंडाते ही ओले पड़े। – काम शुरू होते ही बाधा।
- सौ दिन चोर के एक दिन साहूकार का। – अपराधी अंततः पकड़ा जाता है।
- हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और। – कपटपूर्ण व्यवहार।
- आँख का अंधा नाम नयनसुख। – नाम और गुण में अंतर।
- आसमान के तारे तोड़ना। – असंभव कार्य।
- आटे-दाल का भाव मालूम होना। – कठिनाई समझना।
- एक और एक ग्यारह होते हैं। – एकता में शक्ति।
- एक हाथ से ताली नहीं बजती। – झगड़े में दोनों की गलती।
- कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी। – आदत नहीं बदलती।
- कौआ चला हंस की चाल। – नकल में असफल।
- खाली दिमाग शैतान का घर। – निष्क्रियता से बुराई।
- गधे के सिर से सींग। – अचानक गायब।
- घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध। – अपने की उपेक्षा।
- घी के दिए जलाना। – अत्यधिक खुशी मनाना।
- चमकती हर चीज सोना नहीं होती। – बाहरी आकर्षण धोखा।
- चिराग तले अंधेरा। – निकट की कमी।
- जितने मुँह उतनी बातें। – विभिन्न मत।
- जंगल में मंगल। – अनुचित स्थान पर खुशी।
- टके की हाँड़ी बार-बार नहीं चढ़ती। – धोखा बार-बार नहीं चलता।
- ढोल की पोल खुलना। – भेद खुल जाना।
- तूफान से पहले सन्नाटा। – संकट पूर्व शांति।
- दाल में कुछ काला है। – संदेह।
- न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी। – कारण हटाओ परिणाम हटेगा।
- निंदक नियरे राखिए। – आलोचना लाभकारी।
- पाँव की जूती सिर पर रखना। – अपमान करना।
- पेट का पानी न पचना। – रहस्य न रखना।
- फूटी कौड़ी न देना। – बिल्कुल सहायता न करना।
- बंदर बाँट। – अन्यायपूर्ण बँटवारा।
- भूखे भजन न होय गोपाला। – आवश्यकता पहले।
- मन चंगा तो कठौती में गंगा। – पवित्र मन सर्वोपरि।
- मुँह में पानी आना। – लालच होना।
- रस्सी जल गई पर बल नहीं गया। – घमंड बना रहना।
- लालच का फल बुरा होता है। – लालच हानिकारक।
- वक्त पर किया काम फल देता है। – समय पर कार्य आवश्यक।
- शेर की खाल में गीदड़। – दिखावा करने वाला।
- साँप भी मर जाए लाठी भी न टूटे। – बिना नुकसान काम निकालना।
- साँप निकल गया लकीर पीटना। – समय निकल जाने पर पछताना।
- हाथ मलते रह जाना। – पछताना।
#Actual Use
लोकोक्तियाँ – प्रयोग
- उसने समय पर पढ़ाई नहीं की और अब पछता रहा है — अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
- रवि ने मेहनत की और प्रथम आया — मेहनत का फल मीठा होता है।
- वह अपनी गलती दूसरों पर डालता है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- राम ने देर से ही सही, अपनी आदत सुधार ली — देर आए दुरुस्त आए।
- उसने बुरा कर्म किया, अब परिणाम भुगत रहा है — जैसा करोगे वैसा भरोगे।
- कम संसाधनों में काम नहीं चल सकता — ऊँट के मुँह में जीरा।
- एक ही वस्तु के कई दावेदार हैं — एक अनार सौ बीमार।
- वह सच्चा है, उसे डरने की जरूरत नहीं — साँच को आँच नहीं।
- मिल-जुलकर काम करने से सफलता मिली — एकता में बल है।
- वह हमेशा लालच करता है — लालच बुरी बला है।
- वह बहुत देर से आया, पर सुधर गया — देर आए दुरुस्त आए।
- उसने छोटी सी बात को बड़ा बना दिया — राई का पहाड़ बनाना।
- बिना प्रचार उसकी प्रतिभा छिपी रह गई — जंगल में मोर नाचा किसने देखा।
- किसी ने अपनी गलती स्वीकार नहीं की — एक हाथ से ताली नहीं बजती।
- अपराधी अंततः पकड़ा गया — सौ दिन चोर के एक दिन साहूकार का।
- कठिन समय में गलत निर्णय लिया — विनाश काले विपरीत बुद्धि।
- अपने घरवालों की उपेक्षा की — घर की मुर्गी दाल बराबर।
- उसने एक ही प्रयास से दो काम कर लिए — एक पंथ दो काज।
- वह दिखावा अधिक करता है — ऊँची दुकान फीका पकवान।
- बिना परिश्रम फल नहीं मिलता — बिन मेहनत फल नहीं।
- सत्य अंत में जीतता है — साँच को आँच नहीं।
- छोटे प्रयास से बड़ा परिणाम मिला — बूंद-बूंद से सागर भरता है।
- उसने संकट में भी धैर्य रखा — मन के हारे हार है।
- दोषी स्वयं घबराने लगा — चोर की दाढ़ी में तिनका।
- वह अकेले काम नहीं कर सकता — अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता।
- गलत संगति से वह बिगड़ गया — खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है।
- वह दूसरों को दोष देता है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- वह शक्तिशाली है इसलिए उसका अधिकार चलता है — जिसकी लाठी उसकी भैंस।
- समय पर काम करना चाहिए — काल करे सो आज कर।
- उसने स्वार्थ सिद्ध किया — अपना उल्लू सीधा करना।
- वह अपनी गलती पर पछता रहा है — साँप निकल गया लकीर पीटना।
- वह दिखावटी है — हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और।
- छोटे-छोटे प्रयास से सफलता मिली — बूंद-बूंद से घड़ा भरता है।
- उसने दोनों ओर से लाभ लिया — आम के आम गुठलियों के दाम।
- वह बिना कारण शोर मचा रहा है — आसमान सिर पर उठाना।
- संकट में धैर्य रखना चाहिए — जहाँ चाह वहाँ राह।
- एकता से शक्ति मिलती है — एक और एक ग्यारह।
- वह अपनी कमी छिपा रहा है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- अपराध छिप नहीं सकता — चोर की दाढ़ी में तिनका।
- उसने बिना सोचे जोखिम लिया — ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर।
- उसकी मेहनत रंग लाई — मेहनत का फल मीठा होता है।
- दूसरों की आलोचना लाभकारी है — निंदक नियरे राखिए।
- वह बहुत कंजूस है — चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए।
- वह अत्यधिक चिंतित रहता है — चिता से बड़ी चिंता।
- उसने अचानक सफलता पाई — अंधे के हाथ बटेर लगना।
- भाग्य अच्छा था इसलिए बच गया — जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय।
- एक बुरा व्यक्ति सबको बदनाम करता है — एक मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है।
- वह चालाक है — तू डाल-डाल मैं पात-पात।
- उसने दूसरों को धोखा दिया — मुँह में राम बगल में छुरी।
- उसने समय रहते सुधार किया — जब जागो तभी सवेरा।
- उसने छोटा लाभ भी स्वीकार किया — भागते भूत की लंगोटी सही।
- वह दुविधा में फँस गया — आगे कुआँ पीछे खाई।
- उसने छोटी बात बढ़ा दी — राई का पहाड़।
- सच्चाई सामने आ गई — ढोल की पोल खुलना।
- वह हमेशा दूसरों का अनुकरण करता है — भेड़ चाल चलना।
- उसने बिना सोचे काम किया — अति का भला न बोलना।
- वह अयोग्य है — बंदर के हाथ में उस्तरा।
- बिना सावधानी हानि हुई — सावधानी हटी दुर्घटना घटी।
- वह दिखावा करता है — नाम बड़े और दर्शन छोटे।
- उसने समय का महत्व समझा — समय बड़ा बलवान।
- उसने गलत संगति अपनाई — कोयले की दलाली में मुँह काला।
- उसने बुरा कर्म किया — पाप का घड़ा भरता है।
- वह अशिक्षित है — काला अक्षर भैंस बराबर।
- उसने कठोर उत्तर दिया — ईंट का जवाब पत्थर से देना।
- उसने पहले लाभ सुनिश्चित किया — आम खाने से मतलब, पेड़ गिनने से क्या।
- उसने धैर्य रखा — मन चंगा तो कठौती में गंगा।
- वह हमेशा बदलता रहता है — पल में तोला पल में माशा।
- उसने बुरा परिणाम भुगता — जैसी करनी वैसी भरनी।
- वह कंजूस है — फूटी कौड़ी न देना।
- वह दूसरों की परवाह नहीं करता — आग लगे बस्ती में हम अपनी मस्ती में।
- उसने बिना सोचे खर्च किया — जितनी चादर हो उतने ही पैर फैलाओ (का पालन नहीं किया)।
- उसने सबका विश्वास जीता — साँच को आँच नहीं।
- वह दुष्ट है — चोर-चोर मौसेरे भाई।
- उसने कठिन परिस्थिति में प्रयास किया — तूफान में दीया जलाना।
- वह दूसरों की नकल करता है — कौआ चला हंस की चाल।
- उसने सही समय पर काम किया — काल करे सो आज कर।
- वह अपने स्वार्थ में लगा है — अपनी ढपली अपना राग।
- उसने अंततः सफलता पाई — अंत भला तो सब भला।
- वह जल्दी घमंड करता है — रस्सी जल गई पर बल नहीं गया।
- उसने अनुचित शर्त रखी — न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी।
- उसने दूसरों की उपेक्षा की — घर का जोगी जोगड़ा।
- उसने कठिनाई समझी — आटे-दाल का भाव मालूम होना।
- वह अत्यधिक बोलता है — थोथा चना बाजे घना।
- उसने रहस्य खोल दिया — ढोल की पोल खुल गई।
- वह दूसरों की आलोचना से सीखता है — निंदक घर में राखिए।
- उसने गलत कार्य किया — बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय।
- वह अत्यधिक खुश हुआ — घी के दिए जलाना।
- उसने गलत निर्णय लिया — विनाश काले विपरीत बुद्धि।
- वह असमंजस में है — इधर कुआँ उधर खाई।
- उसने थोड़ा लाभ भी स्वीकार किया — भागते भूत की लंगोटी सही।
- वह दूसरों को दोष देता है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- उसने परिश्रम से सफलता पाई — मेहनत का फल मीठा होता है।
- वह बिना प्रचार गुमनाम रह गया — जंगल में मोर नाचा किसने देखा।
- उसने बुराई की और परिणाम भुगता — जैसी करनी वैसी भरनी।
- वह समय का महत्व नहीं समझता — समय बड़ा बलवान।
- उसने कठिन परिस्थिति में साहस दिखाया — शेर की एक दिन की जिंदगी गीदड़ की सौ साल से अच्छी।
- उसने दूसरों को ठगा — बंदर बाँट।
- उसने न्याय किया — दूध का दूध पानी का पानी।
- उसने बहुत अपराध किए, पर अंत में पकड़ा गया — सौ दिन चोर के एक दिन साहूकार का।
- वह बिना सोचे जोखिम उठा बैठा — ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर।
- उसने एक ही काम से दो लाभ कमाए — एक तीर से दो शिकार।
- बिना परिश्रम सफलता की उम्मीद व्यर्थ है — बिन मेहनत फल नहीं।
- उसने अपने घरवालों को महत्व नहीं दिया — घर की मुर्गी दाल बराबर।
- वह हमेशा दूसरों का अनुकरण करता है — भेड़ चाल चलना।
- उसकी असलीियत सामने आ गई — ढोल की पोल खुल गई।
- संकट के समय उसने गलत निर्णय लिया — विनाश काले विपरीत बुद्धि।
- वह अत्यधिक कंजूस है — चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए।
- छोटा लाभ भी स्वीकार करना चाहिए — भागते भूत की लंगोटी सही।
- उसने बहुत शोर मचा दिया — आसमान सिर पर उठाना।
- वह शक्तिशाली है, इसलिए उसका अधिकार चलता है — जिसकी लाठी उसकी भैंस।
- सत्य अंततः विजयी होता है — साँच को आँच नहीं।
- वह छोटी बात को बड़ा बना देता है — राई का पहाड़।
- उसने कठोर उत्तर दिया — ईंट का जवाब पत्थर से देना।
- उसकी संगति का प्रभाव साफ दिख रहा है — खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है।
- उसने समय का महत्व समझा — काल करे सो आज कर।
- वह हर बात में स्वार्थ देखता है — अपना उल्लू सीधा करना।
- उसने दिखावा अधिक किया — ऊँची दुकान फीका पकवान।
- एक व्यक्ति की गलती से सब बदनाम हो गए — एक मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है।
- वह अशिक्षित है — काला अक्षर भैंस बराबर।
- उसने समय रहते सुधार किया — जब जागो तभी सवेरा।
- वह अत्यधिक चिंता करता है — चिता से बड़ी चिंता।
- दोनों पक्ष दोषी हैं — एक हाथ से ताली नहीं बजती।
- उसने रहस्य छिपाने की कोशिश की, पर सच सामने आ गया — चोर की दाढ़ी में तिनका।
- बिना प्रचार प्रतिभा व्यर्थ है — जंगल में मोर नाचा किसने देखा।
- उसने अपनी गलती स्वीकार नहीं की — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- उसने दोहरा लाभ कमाया — आम के आम गुठलियों के दाम।
- वह दुविधा में फँस गया — आगे कुआँ पीछे खाई।
- उसने असंभव शर्त रख दी — न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी।
- उसने गलत कर्म किया और फल भुगता — जैसी करनी वैसी भरनी।
- वह हमेशा बदलता रहता है — पल में तोला पल में माशा।
- उसने न्यायपूर्वक निर्णय लिया — दूध का दूध पानी का पानी।
- वह चालाक है — तू डाल-डाल मैं पात-पात।
- उसने सबको धोखा दिया — मुँह में राम बगल में छुरी।
- वह बिना सोचे खर्च करता है — जितनी चादर हो उतने ही पैर फैलाओ (का पालन नहीं करता)।
- उसने कठिनाई का सामना किया — तूफान में दीया जलाना।
- वह बहुत घमंडी है — रस्सी जल गई पर बल नहीं गया।
- वह दिखावटी है — नाम बड़े और दर्शन छोटे।
- वह अयोग्य है — बंदर के हाथ में उस्तरा।
- उसने समय की कीमत समझी — समय बड़ा बलवान।
- उसने दूसरों को दोष दिया — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- वह दूसरों की परवाह नहीं करता — आग लगे बस्ती में हम अपनी मस्ती में।
- उसने थोड़े प्रयास से सफलता पाई — अंधे के हाथ बटेर लगना।
- वह अपने स्वार्थ में लगा है — अपनी ढपली अपना राग।
- उसने बिना सोचे बात फैलाई — जितने मुँह उतनी बातें।
- उसने सही संगति चुनी — जहाँ सुमति तहाँ संपत्ति।
- उसने दूसरों को भड़काया — दाल में कुछ काला है।
- वह हमेशा दूसरों की नकल करता है — कौआ चला हंस की चाल।
- उसने अंततः सफलता प्राप्त की — अंत भला तो सब भला।
- उसने कठिनाई समझी — आटे-दाल का भाव मालूम होना।
- वह अत्यधिक बोलता है — थोथा चना बाजे घना।
- उसने छोटा काम बड़ा बना दिया — राई का पहाड़ बनाना।
- वह न्यायप्रिय है — हाथ कंगन को आरसी क्या।
- उसने गलत संगति अपनाई — कोयले की दलाली में मुँह काला।
- उसने परिश्रम से सफलता पाई — मेहनत का फल मीठा होता है।
- वह बिना प्रमाण आरोप लगाता है — जहाँ धुआँ है वहाँ आग है।
- उसने अवसर गँवा दिया — साँप निकल गया लकीर पीटना।
- वह अत्यधिक प्रसन्न है — घी के दिए जलाना।
- उसने धैर्य रखा — मन के हारे हार है।
- उसने कठोर उपाय अपनाया — घी सीधी उँगली से न निकले तो टेढ़ी करनी पड़ती है।
- उसने छोटी बचत से धन जोड़ा — बूँद-बूँद से घड़ा भरता है।
- वह साहसी है — शेर की एक दिन की जिंदगी गीदड़ की सौ साल से अच्छी।
- उसने अपनी गलती छिपाई — चोर की दाढ़ी में तिनका।
- वह लालची है — लालच बुरी बला है।
- उसने सत्य का साथ दिया — साँच को आँच नहीं।
- वह दूसरों का मजाक उड़ाता है — अंधों में काना राजा।
- उसने जल्दी निर्णय लिया — जोर का झटका धीरे से।
- वह दुविधा में है — इधर कुआँ उधर खाई।
- उसने कठिन परिस्थिति में साहस दिखाया — तूफान में दीया जलाना।
- वह दिखावा करता है — हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और।
- उसने परिश्रम नहीं किया — बिन मेहनत फल नहीं।
- वह अपने स्वार्थ में लिप्त है — अपना उल्लू सीधा करना।
- उसने अपने कर्म का फल पाया — जैसी करनी वैसी भरनी।
- वह दूसरों से ईर्ष्या करता है — खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है।
- उसने देर से सही सुधार किया — देर आए दुरुस्त आए।
- वह गलत निर्णय पर अड़ा है — रस्सी जल गई पर बल नहीं गया।
- उसने अवसर का लाभ उठाया — आम के आम गुठलियों के दाम।
- वह हमेशा शोर मचाता है — आसमान सिर पर उठाना।
- उसने परिश्रम से सफलता अर्जित की — बूँद-बूँद से सागर भरता है।
- वह स्वयं दोषी है — चोर-चोर मौसेरे भाई।
- उसने समय पर काम पूरा किया — काल करे सो आज कर।
- वह अपनी गलती पर पछता रहा है — अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
- उसने न्याय किया — दूध का दूध पानी का पानी।
- वह दूसरों की निंदा से सीखता है — निंदक नियरे राखिए।
- उसने परिश्रम से लक्ष्य पाया — जहाँ चाह वहाँ राह।
- वह अपनी सीमा नहीं जानता — छोटे मुँह बड़ी बात।
- उसने जल्दबाजी में निर्णय लिया — अति सर्वत्र वर्जयेत्।
- वह अयोग्य है — बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।
- उसने कठिन परिश्रम किया — खून पसीना एक करना (समान भाव)।
- वह अपनी गलती से नहीं सीखता — कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी।
- उसने सही समय पर प्रयास किया — समय बड़ा बलवान।
- वह दूसरों को दोष देता है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- उसने दोहरा लाभ कमाया — एक पंथ दो काज।
- वह बुरी संगति में पड़ गया — कोयले की दलाली में मुँह काला।
- उसने अंत में सफलता पाई — अंत भला तो सब भला।
- वह अनुचित व्यवहार करता है — हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और।
- उसने बिना सोचे आरोप लगा दिए — जहाँ धुआँ है वहाँ आग है (ऐसा मान बैठा)।
- वह अवसर गँवा बैठा — साँप निकल गया लकीर पीटना।
- उसने छोटी बचत से बड़ा धन बनाया — बूँद-बूँद से घड़ा भरता है।
- वह अत्यधिक बोलता है — थोथा चना बाजे घना।
- उसने स्वार्थ के लिए मित्रता तोड़ दी — अपना उल्लू सीधा करना।
- वह शक्तिशाली के सामने चुप हो गया — जिसकी लाठी उसकी भैंस।
- उसने देर से ही सही गलती सुधारी — देर आए दुरुस्त आए।
- वह हमेशा दूसरों की नकल करता है — कौआ चला हंस की चाल।
- उसने कठिन परिस्थिति में भी साहस रखा — मन के हारे हार है।
- वह कंजूस है — चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए।
- उसने न्यायपूर्वक निर्णय दिया — दूध का दूध पानी का पानी।
- वह हर बात में दोष निकालता है — निंदक नियरे राखिए (उसके लिए कहा गया)।
- उसने झूठ बोलकर बचने की कोशिश की — चोर की दाढ़ी में तिनका।
- वह छोटी बात को बड़ा बना देता है — राई का पहाड़।
- उसने मेहनत से सफलता पाई — मेहनत का फल मीठा होता है।
- वह गलत निर्णय पर अड़ा रहा — रस्सी जल गई पर बल नहीं गया।
- उसने असंभव शर्त रख दी — न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी।
- वह अयोग्य होते हुए भी दिखावा करता है — हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और।
- उसने समय का सही उपयोग किया — काल करे सो आज कर।
- वह हर बार बहाना बनाता है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- उसने एक ही प्रयास से दो लाभ उठाए — एक तीर से दो शिकार।
- वह बुरी संगति में पड़ गया — कोयले की दलाली में मुँह काला।
- उसने अंततः सफलता प्राप्त की — अंत भला तो सब भला।
- वह दुविधा में है — आगे कुआँ पीछे खाई।
- उसने छोटी गलती का बड़ा परिणाम भुगता — बूँद से गई वह हौज से नहीं आती।
- वह अपने क्षेत्र में बहुत साहसी है — अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है।
- उसने अवसर का सही उपयोग किया — आम के आम गुठलियों के दाम।
- वह दूसरों की परवाह नहीं करता — आग लगे बस्ती में हम अपनी मस्ती में।
- उसने बिना सोचे जोखिम उठाया — ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर।
- वह दूसरों को भड़काता है — दाल में कुछ काला है।
- उसने जल्दी निर्णय लिया — अति सर्वत्र वर्जयेत् (का पालन नहीं किया)।
- वह हमेशा बदलता रहता है — पल में तोला पल में माशा।
- उसने बुरा कर्म किया — जैसी करनी वैसी भरनी।
- वह दिखावा अधिक करता है — नाम बड़े और दर्शन छोटे।
- उसने कठिन परिश्रम किया — बिन मेहनत फल नहीं।
- वह गलत समय पर हँसा — चिता से बड़ी चिंता।
- उसने रहस्य उजागर कर दिया — ढोल की पोल खुल गई।
- वह अशिक्षित है — काला अक्षर भैंस बराबर।
- उसने सही संगति चुनी — जहाँ सुमति तहाँ संपत्ति।
- वह दूसरों की गलती दोहराता है — कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी।
- उसने दोहरा लाभ उठाया — एक पंथ दो काज।
- वह अत्यधिक खुश है — घी के दिए जलाना।
- उसने गलत निर्णय लिया — विनाश काले विपरीत बुद्धि।
- वह कपटी है — मुँह में राम बगल में छुरी।
- उसने कठिनाई समझी — आटे-दाल का भाव मालूम होना।
- वह अयोग्य है — बंदर के हाथ में उस्तरा।
- उसने गलत संगति का प्रभाव लिया — खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है।
- वह समय का महत्व नहीं समझता — समय बड़ा बलवान।
- उसने छोटी बचत से सफलता पाई — बूँद-बूँद से सागर भरता है।
- वह दूसरों को दोष देता है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- उसने साहस दिखाया — शेर की एक दिन की जिंदगी गीदड़ की सौ साल से अच्छी।
- वह अपराध करके बच नहीं पाया — सौ दिन चोर के एक दिन साहूकार का।
- उसने बिना प्रमाण आरोप लगाया — जहाँ धुआँ है वहाँ आग है।
- वह अत्यधिक लालची है — लालच बुरी बला है।
- उसने सत्य का साथ दिया — साँच को आँच नहीं।
- वह दूसरों की उपेक्षा करता है — घर की मुर्गी दाल बराबर।
- उसने छोटा लाभ भी स्वीकार किया — भागते भूत की लंगोटी सही।
- वह स्वार्थी है — अपनी ढपली अपना राग।
- उसने कठोर उत्तर दिया — ईंट का जवाब पत्थर से देना।
- वह दुविधा में है — इधर कुआँ उधर खाई।
- उसने सही समय पर प्रयास किया — जहाँ चाह वहाँ राह।
- वह दूसरों की नकल करता है — भेड़ चाल चलना।
- उसने न्याय किया — हाथ कंगन को आरसी क्या।
- वह हमेशा दोष ढूँढता है — चोर की दाढ़ी में तिनका।
- उसने गलत निर्णय पर पछताया — अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
- वह शक्तिशाली है इसलिए जीत गया — जिसकी लाठी उसकी भैंस।
- उसने परिश्रम से सफलता अर्जित की — मेहनत का फल मीठा होता है।
- वह अपनी सीमा से अधिक बोलता है — छोटे मुँह बड़ी बात।
- उसने समय पर काम किया — काल करे सो आज कर।
- वह दिखावटी है — ऊँची दुकान फीका पकवान।
- उसने रहस्य उजागर किया — ढोल की पोल खुल गई।
- वह बिना सोचे काम करता है — अति का भला न बोलना।
- उसने छोटी गलती से बड़ा नुकसान किया — बूँद से गई वह हौज से नहीं आती।
- वह बुरे लोगों की संगति में है — चोर-चोर मौसेरे भाई।
- उसने कठिन परिस्थिति में भी प्रयास किया — तूफान में दीया जलाना।
- वह जल्दी घमंड करता है — रस्सी जल गई पर बल नहीं गया।
- उसने दोहरा लाभ कमाया — आम के आम गुठलियों के दाम।
- वह दूसरों को दोष देता है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- उसने अपनी गलती नहीं मानी — पल में तोला पल में माशा।
- वह अपने स्वार्थ में लगा है — अपना उल्लू सीधा करना।
- उसने अंत में सफलता पाई — अंत भला तो सब भला।
- वह समय रहते नहीं सुधरा — साँप निकल गया लकीर पीटना।
- उसने कठिन परिश्रम किया — बिन मेहनत फल नहीं।
- वह अयोग्य है — बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।
- उसने दूसरों का विश्वास जीता — साँच को आँच नहीं।
- वह अपनी आदत नहीं बदलता — कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी।
- उसने सही संगति चुनी — जहाँ सुमति तहाँ संपत्ति।
- वह अत्यधिक चिंतित है — चिता से बड़ी चिंता।
- उसने कठिन परिस्थिति में धैर्य रखा — मन के हारे हार है।
- वह गलत निर्णय पर अड़ा है — रस्सी जल गई पर बल नहीं गया।
- उसने न्याय किया — दूध का दूध पानी का पानी।
- वह समय का महत्व समझता है — समय बड़ा बलवान।
- उसने परिश्रम से सफलता पाई — बूँद-बूँद से घड़ा भरता है।
- वह दूसरों को दोष देता है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
- उसने अवसर का लाभ उठाया — एक पंथ दो काज।
- वह बुरी संगति में पड़ गया — कोयले की दलाली में मुँह काला।
- उसने अंततः सफलता प्राप्त की — अंत भला तो सब भला।
- वह दिखावा करता है — हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और।
#Exercise (Objective)
लोकोक्तियाँ – Objective Questions
- ‘नाच न जाने आँगन टेढ़ा’ का अर्थ है – (a) नृत्य करना (b) अपनी कमी दूसरों पर डालना (c) घर छोटा होना (d) आँगन खराब होना उत्तर: (b)
- ‘देर आए दुरुस्त आए’ का आशय है – (a) देर से आना बुरा है (b) देर से सुधार भी अच्छा है (c) जल्दी आना चाहिए (d) देर करना ठीक है उत्तर: (b)
- ‘एक अनार सौ बीमार’ का अर्थ है – (a) फल खराब है (b) संसाधन कम, चाहने वाले अधिक (c) बीमारी फैलना (d) अनार महँगा है उत्तर: (b)
- ‘साँच को आँच नहीं’ का अर्थ है – (a) आग लगना (b) सत्य की विजय (c) भोजन पकाना (d) गर्मी होना उत्तर: (b)
- ‘घर का भेदी लंका ढाए’ का आशय है – (a) घर सुंदर है (b) अपना व्यक्ति नुकसान पहुँचाता है (c) लंका नष्ट हुई (d) युद्ध होना उत्तर: (b)
- ‘बूंद-बूंद से सागर भरता है’ का अर्थ है – (a) समुद्र बड़ा है (b) छोटी बचत से बड़ा परिणाम (c) वर्षा होना (d) पानी कम है उत्तर: (b)
- ‘जैसा करोगे वैसा भरोगे’ का अर्थ है – (a) जल्दी करो (b) कर्म के अनुसार फल (c) काम दोहराओ (d) भरपाई करो उत्तर: (b)
- ‘ऊँची दुकान फीका पकवान’ का अर्थ है – (a) दुकान बड़ी है (b) दिखावा अधिक गुणवत्ता कम (c) भोजन अच्छा है (d) ग्राहक कम हैं उत्तर: (b)
- ‘लालच बुरी बला है’ का अर्थ है – (a) लाल रंग बुरा है (b) लालच हानिकारक है (c) धन कम है (d) वस्तु खराब है उत्तर: (b)
- ‘अंधों में काना राजा’ का अर्थ है – (a) राजा अंधा है (b) मूर्खों में थोड़ा ज्ञानी श्रेष्ठ (c) सब अंधे हैं (d) आँख खराब है उत्तर: (b)
- ‘जहाँ चाह वहाँ राह’ का आशय है – (a) रास्ता लंबा है (b) इच्छा से मार्ग मिलता है (c) सड़क बनाना (d) यात्रा करना उत्तर: (b)
- ‘नौ दिन चले अढ़ाई कोस’ का अर्थ है – (a) तेज यात्रा (b) धीमी प्रगति (c) लंबी दूरी (d) विश्राम उत्तर: (b)
- ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ का आशय है – (a) दाढ़ी गंदी है (b) दोषी स्वयं डरता है (c) तिनका गिरा (d) चोरी पकड़ी गई उत्तर: (b)
- ‘दूध का दूध पानी का पानी’ का अर्थ है – (a) दूध शुद्ध है (b) न्याय करना (c) पानी मिलाना (d) सफाई करना उत्तर: (b)
- ‘सावधानी हटी दुर्घटना घटी’ का अर्थ है – (a) खेल खेलना (b) लापरवाही से हानि (c) सावधान रहना (d) दुर्घटना होना उत्तर: (b)
- ‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता’ का अर्थ है – (a) चना कठोर है (b) अकेले बड़ा काम संभव नहीं (c) भाड़ गर्म है (d) भोजन पकाना उत्तर: (b)
- ‘जितनी चादर हो उतने ही पैर फैलाओ’ का अर्थ है – (a) बिस्तर बड़ा है (b) आय अनुसार खर्च करो (c) पैर छोटे हैं (d) चादर खरीदो उत्तर: (b)
- ‘अंत भला तो सब भला’ का अर्थ है – (a) शुरुआत अच्छी हो (b) परिणाम अच्छा हो तो सब अच्छा (c) बीच अच्छा हो (d) फर्क नहीं पड़ता उत्तर: (b)
- ‘एक पंथ दो काज’ का अर्थ है – (a) दो रास्ते (b) एक कार्य से दो लाभ (c) दो कार्य (d) दो मित्र उत्तर: (b)
- ‘राई का पहाड़ बनाना’ का अर्थ है – (a) पहाड़ बनाना (b) छोटी बात को बड़ा करना (c) खेती करना (d) खेलना उत्तर: (b)
- ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’ का अर्थ है – (a) नाम बड़ा है (b) दिखावा अधिक काम कम (c) छोटा व्यक्ति (d) बड़ा मंदिर उत्तर: (b)
- ‘काल करे सो आज कर’ का आशय है – (a) देर करो (b) कार्य समय पर करो (c) कल पर छोड़ो (d) आराम करो उत्तर: (b)
- ‘सौ दिन चोर के एक दिन साहूकार का’ का अर्थ है – (a) चोर अमीर है (b) अपराधी अंत में पकड़ा जाता है (c) साहूकार गरीब है (d) दिन लंबा है उत्तर: (b)
- ‘काला अक्षर भैंस बराबर’ का अर्थ है – (a) भैंस काली है (b) अशिक्षित व्यक्ति (c) खेत खराब है (d) अक्षर बड़ा है उत्तर: (b)
- ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’ का अर्थ है – (a) भोजन सस्ता है (b) अपने का मूल्य कम समझना (c) मुर्गी दाल खाती है (d) घर छोटा है उत्तर: (b)
- ‘जहाँ धुआँ है वहाँ आग है’ का अर्थ है – (a) आग लग गई (b) हर बात का कारण होता है (c) धुआँ अधिक है (d) धूप है उत्तर: (b)
- ‘भागते भूत की लंगोटी सही’ का अर्थ है – (a) भूत भाग गया (b) थोड़ा लाभ भी स्वीकार्य (c) लंगोटी खरीदना (d) डरना उत्तर: (b)
- ‘रस्सी जल गई पर बल नहीं गया’ का अर्थ है – (a) रस्सी जल गई (b) घमंड बना रहता है (c) आग लगी (d) बल समाप्त हुआ उत्तर: (b)
- ‘खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है’ का अर्थ है – (a) फल रंगीन है (b) संगति का प्रभाव (c) मौसम बदलना (d) फल खराब है उत्तर: (b)
- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ का अर्थ है – (a) काम दोहराना (b) कर्मफल सिद्धांत (c) भरपाई करना (d) खेलना उत्तर: (b)
- ‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता’ का प्रयोग कब होता है? (a) भोजन बनाते समय (b) सामूहिक कार्य के प्रसंग में (c) खेत जोतते समय (d) यात्रा करते समय उत्तर: (b)
- ‘जैसा देश वैसा भेष’ का अर्थ है – (a) देश बदलना (b) परिस्थिति अनुसार व्यवहार (c) वस्त्र बदलना (d) यात्रा करना उत्तर: (b)
- ‘मुँह में राम बगल में छुरी’ का अर्थ है – (a) धार्मिक व्यक्ति (b) कपटी व्यक्ति (c) साधु (d) सैनिक उत्तर: (b)
- ‘आगे कुआँ पीछे खाई’ का आशय है – (a) यात्रा (b) दुविधा (c) खेल (d) विश्राम उत्तर: (b)
- ‘बूँद से गई वह हौज से नहीं आती’ का अर्थ है – (a) पानी कम है (b) छोटी गलती बड़ा नुकसान (c) हौज सूख गया (d) वर्षा कम हुई उत्तर: (b)
- ‘कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी’ का अर्थ है – (a) जानवर बीमार है (b) आदत नहीं बदलती (c) दुम छोटी है (d) खेलना उत्तर: (b)
- ‘निंदक नियरे राखिए’ का आशय है – (a) निंदा करना (b) आलोचक से लाभ (c) झगड़ा करना (d) दूरी रखना उत्तर: (b)
- ‘अपना हाथ जगन्नाथ’ का अर्थ है – (a) मंदिर जाना (b) आत्मनिर्भर होना (c) पूजा करना (d) हाथ उठाना उत्तर: (b)
- ‘एकता में बल है’ का प्रयोग कब होता है? (a) झगड़े में (b) सामूहिक सफलता में (c) परीक्षा में (d) भोजन में उत्तर: (b)
- ‘समय बड़ा बलवान’ का आशय है – (a) समय लंबा है (b) समय सबसे शक्तिशाली है (c) घड़ी खराब है (d) काम कठिन है उत्तर: (b)
- ‘भेड़ चाल चलना’ का अर्थ है – (a) दौड़ना (b) अंधानुकरण (c) झगड़ना (d) खेलना उत्तर: (b)
- ‘ढोल की पोल खुलना’ का अर्थ है – (a) संगीत बजना (b) भेद खुल जाना (c) ढोल फटना (d) उत्सव होना उत्तर: (b)
- ‘अंधे के हाथ बटेर लगना’ का अर्थ है – (a) शिकार करना (b) बिना प्रयास सफलता (c) जंगल जाना (d) खेलना उत्तर: (b)
- ‘लाठी के बल भैंस’ का अर्थ है – (a) खेती करना (b) बल से अधिकार (c) पशुपालन (d) खेल उत्तर: (b)
- ‘जैसा बोओगे वैसा काटोगे’ का अर्थ है – (a) खेती (b) कर्मफल (c) काटना (d) फल बेचना उत्तर: (b)
- ‘मन के हारे हार है’ का आशय है – (a) हारना (b) आत्मविश्वास आवश्यक (c) खेल हारना (d) परीक्षा हारना उत्तर: (b)
- ‘दूर के ढोल सुहावने’ का अर्थ है – (a) संगीत (b) दूर की वस्तु आकर्षक लगती है (c) ढोल बजाना (d) उत्सव उत्तर: (b)
- ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ का अर्थ है – (a) फल बेचना (b) दोहरा लाभ (c) आम खाना (d) बाजार जाना उत्तर: (b)
- ‘छोटे मुँह बड़ी बात’ का अर्थ है – (a) छोटा बच्चा (b) क्षमता से अधिक बोलना (c) बोलना बंद (d) खेलना उत्तर: (b)
- ‘जितने मुँह उतनी बातें’ का आशय है – (a) लोग अधिक (b) अलग-अलग मत (c) भोजन (d) झगड़ा उत्तर: (b)
- ‘बंदर बाँट’ का अर्थ है – (a) खेल (b) अन्यायपूर्ण विभाजन (c) जंगल (d) पेड़ उत्तर: (b)
- ‘घी के दिए जलाना’ का अर्थ है – (a) दीपावली (b) अत्यधिक प्रसन्नता (c) पूजा (d) आग उत्तर: (b)
- ‘पल में तोला पल में माशा’ का अर्थ है – (a) वजन (b) चंचल स्वभाव (c) व्यापार (d) खरीदना उत्तर: (b)
- ‘कोयले की दलाली में मुँह काला’ का अर्थ है – (a) कोयला बेचना (b) बुरे कार्य से बदनामी (c) चेहरा काला (d) व्यापार उत्तर: (b)
- ‘भागते भूत की लंगोटी सही’ का प्रयोग कब होता है? (a) डरने पर (b) थोड़ा लाभ भी स्वीकार्य हो (c) भूत देखने पर (d) यात्रा उत्तर: (b)
- ‘खाली बर्तन अधिक बजते हैं’ का अर्थ है – (a) बर्तन शोर करते हैं (b) अज्ञानी अधिक बोलता है (c) रसोई (d) खेल उत्तर: (b)
- ‘अति सर्वत्र वर्जयेत्’ का अर्थ है – (a) अति अच्छी है (b) किसी भी चीज़ की अति बुरी है (c) पढ़ाई (d) खेल उत्तर: (b)
- ‘जंगल में मोर नाचा किसने देखा’ का अर्थ है – (a) जंगल (b) बिना प्रचार प्रतिभा व्यर्थ (c) वर्षा (d) मोर उत्तर: (b)
- ‘घर फूँक तमाशा देखना’ का अर्थ है – (a) घर जलाना (b) अपना नुकसान कर आनंद लेना (c) आग (d) उत्सव उत्तर: (b)
- ‘तू डाल-डाल मैं पात-पात’ का अर्थ है – (a) पेड़ (b) अत्यधिक चालाकी (c) खेल (d) पत्ता उत्तर: (b)
- ‘जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय’ का अर्थ है – (a) युद्ध करना (b) ईश्वर रक्षा करता है (c) मारना (d) डरना उत्तर: (b)
- ‘एक और एक ग्यारह’ का आशय है – (a) गणित (b) एकता में शक्ति (c) गिनती (d) व्यापार उत्तर: (b)
- ‘साँप निकल गया लकीर पीटना’ का अर्थ है – (a) साँप पकड़ना (b) अवसर निकल जाने पर पछताना (c) डरना (d) खेत जोतना उत्तर: (b)
- ‘चमकती हर चीज सोना नहीं होती’ का अर्थ है – (a) सोना महँगा है (b) बाहरी आकर्षण धोखा हो सकता है (c) सोना चमकता है (d) व्यापार उत्तर: (b)
- ‘जैसा राजा वैसी प्रजा’ का आशय है – (a) राजा अच्छा है (b) नेतृत्व का प्रभाव (c) प्रजा अधिक है (d) युद्ध उत्तर: (b)
- ‘आसमान सिर पर उठाना’ का अर्थ है – (a) आकाश देखना (b) बहुत शोर मचाना (c) दौड़ना (d) खेलना उत्तर: (b)
- ‘बंदर के हाथ में उस्तरा’ का अर्थ है – (a) नाई (b) अयोग्य को अधिकार (c) जंगल (d) खेल उत्तर: (b)
- ‘सिर मुंडाते ही ओले पड़े’ का अर्थ है – (a) वर्षा (b) काम शुरू होते ही बाधा (c) खेत (d) यात्रा उत्तर: (b)
- ‘न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी’ का अर्थ है – (a) संगीत (b) कारण हटाओ समस्या हटेगी (c) बाँस काटना (d) यात्रा उत्तर: (b)
- ‘जाके पैर न फटी बिवाई सो क्या जाने पीर पराई’ का अर्थ है – (a) दर्द (b) जिसने कष्ट न सहा वह दुख नहीं समझता (c) पैर दुखना (d) चलना उत्तर: (b)
- ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का अर्थ है – (a) नदी (b) शुद्ध मन सर्वोपरि (c) पानी (d) यात्रा उत्तर: (b)
- ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ का अर्थ है – (a) अंधेरा (b) अव्यवस्थित शासन (c) नगर सुंदर (d) युद्ध उत्तर: (b)
- ‘लोभ में हानि’ का अर्थ है – (a) लाभ (b) लालच से नुकसान (c) व्यापार (d) धन उत्तर: (b)
- ‘हाथ कंगन को आरसी क्या’ का अर्थ है – (a) गहना (b) प्रत्यक्ष प्रमाण पर्याप्त (c) दर्पण (d) विवाह उत्तर: (b)
- ‘ऊँट पहाड़ के नीचे’ का अर्थ है – (a) यात्रा (b) घमंड टूट जाना (c) पहाड़ (d) ऊँट उत्तर: (b)
- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ का प्रयोग कब होता है? (a) खेल (b) कर्मफल के प्रसंग में (c) भोजन (d) यात्रा उत्तर: (b)
- ‘घर का जोगी जोगड़ा’ का अर्थ है – (a) साधु (b) अपने की उपेक्षा (c) पूजा (d) खेल उत्तर: (b)
- ‘पाप का घड़ा भरता है’ का अर्थ है – (a) घड़ा भरना (b) बुराई का फल अवश्य मिलता है (c) पानी (d) खेत उत्तर: (b)
- ‘चिराग तले अंधेरा’ का अर्थ है – (a) दीपक (b) पास की कमी (c) अंधेरा (d) रात उत्तर: (b)
- ‘टके सेर भाजी टके सेर खाजा’ का अर्थ है – (a) बाजार (b) मूल्यहीन वस्तु (c) खाना (d) यात्रा उत्तर: (b)
- ‘ईंट का जवाब पत्थर से देना’ का अर्थ है – (a) मकान बनाना (b) कठोर प्रत्युत्तर देना (c) खेल (d) पत्थर फेंकना उत्तर: (b)
- ‘खाली दिमाग शैतान का घर’ का अर्थ है – (a) घर (b) निष्क्रियता से बुराई (c) दिमाग (d) खेल उत्तर: (b)
- ‘एक चुप सौ सुख’ का अर्थ है – (a) चुप रहना (b) मौन में लाभ (c) झगड़ा (d) खेल उत्तर: (b)
- ‘दाने-दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम’ का अर्थ है – (a) भोजन (b) भाग्य अनुसार प्राप्ति (c) खेत (d) यात्रा उत्तर: (b)
- ‘तूफान से पहले सन्नाटा’ का अर्थ है – (a) मौसम (b) संकट पूर्व शांति (c) हवा (d) यात्रा उत्तर: (b)
- ‘घी सीधी उँगली से न निकले तो टेढ़ी करनी पड़ती है’ का अर्थ है – (a) घी निकालना (b) कभी कठोर उपाय जरूरी (c) भोजन (d) खेल उत्तर: (b)
- ‘भूखे भजन न होय गोपाला’ का अर्थ है – (a) पूजा (b) पहले आवश्यकता पूरी हो (c) भोजन (d) गीत उत्तर: (b)
- ‘जंगल में मंगल’ का अर्थ है – (a) जंगल (b) अनुचित स्थान पर खुशी (c) यात्रा (d) खेल उत्तर: (b)
- ‘आटे-दाल का भाव मालूम होना’ का अर्थ है – (a) बाजार (b) कठिनाई समझना (c) भोजन (d) व्यापार उत्तर: (b)
- ‘अति का भला न बोलना’ का अर्थ है – (a) बोलना (b) अति हर चीज की बुरी (c) खेल (d) भोजन उत्तर: (b)
#Worksheet
लोकोक्तियाँ – पूर्ण Worksheet
- अपनी कमी छिपाने वाला व्यक्ति — __________।
- कर्म के अनुसार फल मिलता है — __________।
- छोटी-छोटी बचत से बड़ा लाभ — __________।
- देर से सुधार भी अच्छा — __________।
- सत्य की विजय होती है — __________।
- दिखावा अधिक, गुणवत्ता कम — __________।
- एक कार्य से दो लाभ — __________।
- आय अनुसार खर्च करना चाहिए — __________।
- अपराधी अंततः पकड़ा जाता है — __________।
- अत्यधिक लालच हानिकारक है — __________।
- सामूहिक शक्ति का महत्व — __________।
- दुविधा की स्थिति — __________।
- अयोग्य को समझाना व्यर्थ — __________।
- स्वार्थ सिद्ध करना — __________।
- अंत अच्छा तो सब अच्छा — __________।
- ‘अंधों में काना राजा’ का अर्थ लिखिए।
- ‘घर का भेदी लंका ढाए’ का अर्थ लिखिए।
- ‘निंदक नियरे राखिए’ का अर्थ लिखिए।
- ‘ऊँट के मुँह में जीरा’ का अर्थ लिखिए।
- ‘भागते भूत की लंगोटी सही’ का अर्थ लिखिए।
- ‘काला अक्षर भैंस बराबर’ का अर्थ लिखिए।
- ‘राई का पहाड़ बनाना’ का अर्थ लिखिए।
- ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का अर्थ लिखिए।
- ‘भेड़ चाल चलना’ का अर्थ लिखिए।
- ‘रस्सी जल गई पर बल नहीं गया’ का अर्थ लिखिए।
- ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ का अर्थ लिखिए।
- ‘एक हाथ से ताली नहीं बजती’ का अर्थ लिखिए।
- ‘काल करे सो आज कर’ का संदेश क्या है?
- ‘दूध का दूध पानी का पानी’ का अर्थ लिखिए।
- ‘नाच न जाने आँगन टेढ़ा’ का अर्थ लिखिए।
- ‘देर आए दुरुस्त आए’ का अर्थ है देर करना अच्छा है। (सही/गलत)
- ‘सावधानी हटी दुर्घटना घटी’ लापरवाही दर्शाता है। (सही/गलत)
- ‘लालच बुरी बला है’ लालच के दुष्परिणाम को दर्शाता है। (सही/गलत)
- ‘एकता में बल है’ का अर्थ है अकेले काम करना। (सही/गलत)
- ‘अंत भला तो सब भला’ परिणाम की महत्ता दर्शाता है। (सही/गलत)
- ‘कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी’ आदत बदलना दर्शाता है। (सही/गलत)
- ‘ऊँची दुकान फीका पकवान’ गुणवत्ता अच्छी है। (सही/गलत)
- ‘जैसा देश वैसा भेष’ परिस्थिति अनुसार व्यवहार दर्शाता है। (सही/गलत)
- ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’ अपने का महत्व कम आँकना। (सही/गलत)
- ‘बंदर बाँट’ न्यायपूर्ण विभाजन है। (सही/गलत)
- ‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता’ सामूहिकता का संदेश देता है। (सही/गलत)
- ‘नौ दिन चले अढ़ाई कोस’ तेज प्रगति दर्शाता है। (सही/गलत)
- ‘जंगल में मोर नाचा किसने देखा’ प्रचार का महत्व दर्शाता है। (सही/गलत)
- ‘अति सर्वत्र वर्जयेत्’ अति को अच्छा बताता है। (सही/गलत)
- ‘मन के हारे हार है’ आत्मविश्वास का महत्व दर्शाता है। (सही/गलत)
- ‘सौ दिन चोर के एक दिन साहूकार का’ का अर्थ है – (a) चोर अमीर है (b) अपराधी पकड़ा जाता है (c) दिन लंबा है (d) साहूकार गरीब है
- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ का आशय है – (a) खेती (b) कर्मफल (c) खेल (d) व्यापार
- ‘जितने मुँह उतनी बातें’ का अर्थ है – (a) भोजन (b) अलग-अलग मत (c) झगड़ा (d) यात्रा
- ‘सिर मुंडाते ही ओले पड़े’ का अर्थ है – (a) वर्षा (b) काम शुरू होते ही बाधा (c) खेल (d) खेत
- ‘अपना हाथ जगन्नाथ’ का अर्थ है – (a) पूजा (b) आत्मनिर्भरता (c) यात्रा (d) भोजन
- ‘खाली बर्तन अधिक बजते हैं’ का अर्थ है – (a) बर्तन (b) अज्ञानी अधिक बोलता है (c) खेल (d) संगीत
- ‘बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय’ का अर्थ है – (a) खेती (b) जैसा कर्म वैसा फल (c) व्यापार (d) खेल
- ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ का अर्थ है – (a) फल (b) दोहरा लाभ (c) व्यापार (d) बाजार
- ‘ढोल की पोल खुलना’ का अर्थ है – (a) संगीत (b) भेद खुलना (c) उत्सव (d) वर्षा
- ‘जहाँ चाह वहाँ राह’ का अर्थ है – (a) सड़क (b) इच्छा से मार्ग मिलता है (c) यात्रा (d) खेल
- ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ से वाक्य बनाइए।
- ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ से वाक्य बनाइए।
- ‘भागते भूत की लंगोटी सही’ से वाक्य बनाइए।
- ‘काला अक्षर भैंस बराबर’ से वाक्य बनाइए।
- ‘निंदक नियरे राखिए’ से वाक्य बनाइए।
- ‘एक पंथ दो काज’ से वाक्य बनाइए।
- ‘घर का जोगी जोगड़ा’ से वाक्य बनाइए।
- ‘ऊँट पहाड़ के नीचे’ से वाक्य बनाइए।
- ‘सावधानी हटी दुर्घटना घटी’ से वाक्य बनाइए।
- ‘मन के जीते जीत’ से वाक्य बनाइए।
- ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ से वाक्य बनाइए।
- ‘छोटे मुँह बड़ी बात’ से वाक्य बनाइए।
- ‘घर फूँक तमाशा देखना’ से वाक्य बनाइए।
- ‘जितनी लाठी उतनी भैंस’ से वाक्य बनाइए।
- ‘भूखे भजन न होय गोपाला’ से वाक्य बनाइए।
- यदि कोई व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार नहीं करता, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि कोई व्यक्ति बिना परिश्रम सफलता चाहता है, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि कोई देर से सुधार करे, कौन-सी लोकोक्ति कही जाएगी?
- यदि परिणाम अच्छा हो जाए, कौन-सी लोकोक्ति कही जाएगी?
- यदि कोई व्यक्ति अयोग्य है, कौन-सी लोकोक्ति प्रयोग होगी?
- यदि दो पक्षों में विवाद हो, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि छोटी बात को बड़ा बनाया जाए, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि कोई व्यक्ति बहुत कंजूस हो, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि किसी की आदत नहीं बदलती, कौन-सी लोकोक्ति प्रयोग होगी?
- यदि कोई स्वार्थी व्यवहार करे, कौन-सी लोकोक्ति कही जाएगी?
- यदि प्रचार के अभाव में प्रतिभा छिप जाए, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि बल से अधिकार चलाया जाए, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि संगति का प्रभाव पड़े, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि बिना प्रमाण आरोप लगे, कौन-सी लोकोक्ति कही जाएगी?
- यदि कोई आत्मनिर्भर हो, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि अवसर निकल जाने पर पछतावा हो, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि सामूहिक कार्य से सफलता मिले, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि कोई अपने का महत्व कम आँके, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि अपराध के बाद ढोंग किया जाए, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
- यदि समय का महत्व समझाया जाए, कौन-सी लोकोक्ति उपयुक्त है?
उत्तरमाला (संक्षिप्त)
- नाच न जाने आँगन टेढ़ा
- जैसी करनी वैसी भरनी
- बूंद-बूंद से सागर भरता है
- देर आए दुरुस्त आए
- साँच को आँच नहीं
- ऊँची दुकान फीका पकवान
- एक पंथ दो काज
- जितनी चादर हो उतने ही पैर फैलाओ
- सौ दिन चोर के एक दिन साहूकार का
- लालच बुरी बला है
- एकता में बल है
- आगे कुआँ पीछे खाई
- भैंस के आगे बीन बजाना
- अपना उल्लू सीधा करना
- अंत भला तो सब भला
- मूर्खों में थोड़ा ज्ञानी श्रेष्ठ
- अपना व्यक्ति नुकसान पहुँचाता है
- आलोचक लाभकारी होता है
- आवश्यकता से बहुत कम
- थोड़ा लाभ भी स्वीकार्य
- अशिक्षित व्यक्ति
- छोटी बात बड़ा बनाना
- शुद्ध मन सर्वोपरि
- अंधानुकरण
- घमंड बना रहना
- दोषी स्वयं डरता है
- झगड़े में दोनों दोषी
- कार्य समय पर करो
- न्याय करना
- अपनी कमी छिपाना
- गलत
- सही
- सही
- गलत
- सही
- गलत
- गलत
- सही
- सही
- गलत
- सही
- गलत
- सही
- गलत
- सही
- (b)
- (b)
- (b)
- (b)
- (b)
- (b)
- (b)
- (b)
- (b)
- (b)
- स्वनिर्मित
- नाच न जाने आँगन टेढ़ा
- बिन मेहनत फल नहीं
- देर आए दुरुस्त आए
- अंत भला तो सब भला
- बंदर के हाथ में उस्तरा
- एक हाथ से ताली नहीं बजती
- राई का पहाड़ बनाना
- चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए
- कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी
- अपनी ढपली अपना राग
- जंगल में मोर नाचा किसने देखा
- जिसकी लाठी उसकी भैंस
- खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है
- जहाँ धुआँ है वहाँ आग है
- अपना हाथ जगन्नाथ
- साँप निकल गया लकीर पीटना
- एकता में बल है
- घर की मुर्गी दाल बराबर
- नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली
- काल करे सो आज कर