#Detailed Summary
प्रस्तावना:
प्रस्तुत पाठ 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' में लेखक निदा फाज़ली ने यह बताने का प्रयास किया है कि समय के साथ मनुष्य कितना आत्म-केंद्रित (Self-centered) हो गया है। पहले मनुष्य पशु-पक्षियों और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहता था, लेकिन आज उसने अपने स्वार्थ के लिए पूरी प्रकृति का संतुलन बिगाड़ दिया है।
1. सुलेमान (सोलोमन) और चींटियों की कथा:
लेखक सुलेमान का उदाहरण देते हैं, जिन्हें बाइबिल और कुरान दोनों में महान शासक माना गया है। वे केवल मनुष्यों के ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों के भी राजा थे। एक बार सुलेमान अपने लश्कर (सेना) के साथ जा रहे थे। रास्ते में कुछ चींटियों ने घोड़ों के टापों की आवाज़ सुनी और डरकर अपने बिलों की ओर भागने लगीं। सुलेमान ने उनकी भाषा समझ ली और रुककर कहा—""घबराओ नहीं, सुलेमान को खुदा ने सबका रखवाला बनाया है, मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ।"" यह घटना दिखाती है कि उस समय के राजाओं में तुच्छ जीवों के प्रति भी कितनी दया थी।
2. शेख अयाज़ के पिता की संवेदनशीलता:
लेखक अपने संस्मरणों में सिंधी कवि शेख अयाज़ का उल्लेख करते हैं। एक बार उनके पिता कुएँ से नहाकर लौटे और भोजन करने बैठे। अचानक उनकी नज़र अपनी बाँह पर पड़ी, जहाँ एक काला च्योंटा (चींटी) रेंग रहा था। वे तुरंत भोजन छोड़कर खड़े हो गए। माँ ने पूछा कि क्या भोजन अच्छा नहीं लगा? उन्होंने कहा—""नहीं, मैंने एक घरवाले को बेघर कर दिया है, उसे कुएँ पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ।"" यह छोटी-सी घटना जीव-जंतुओं के प्रति उस समय की गहरी संवेदना को दर्शाती है।
3. नूह का दुख और कुत्ते की कथा:
इस्लाम के एक पैगंबर नूह का असली नाम 'लश्कर' था, लेकिन उन्हें 'नूह' (रोने वाला) इसलिए कहा जाता था क्योंकि वे उम्र भर रोते रहे। इसका कारण एक घायल कुत्ता था। एक बार नूह के सामने से एक घायल कुत्ता गुज़रा, तो उन्होंने उसे 'गंदा' कहकर दुत्कार दिया। कुत्ते ने जवाब दिया—""न मैं अपनी मर्ज़ी से कुत्ता हूँ, न तुम अपनी मर्ज़ी से इंसान हो। बनाने वाला तो वही एक खुदा है।"" यह सुनकर नूह को अपनी गलती का अहसास हुआ और वे जीवन भर उस जीव का अपमान करने के पछतावे में रोते रहे।
4. बढ़ती आबादी और पर्यावरण का संकट:
लेखक कहते हैं कि पहले पूरी दुनिया एक परिवार की तरह थी, लेकिन अब इंसान ने दीवारें खड़ी कर दी हैं। समुद्र को पीछे धकेला जा रहा है, जंगलों को काटा जा रहा है और कंक्रीट के जंगल (इमारतें) बनाए जा रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि परिंदों के लिए रहने की जगह नहीं बची। प्रकृति का संतुलन बिगड़ने से गर्मी बढ़ रही है, भूकंप आ रहे हैं और सुनामी जैसी आपदाएं आ रही हैं। प्रकृति अब मनुष्य की ज्यादतियों को सहन नहीं कर पा रही है।
5. लेखक की माँ का प्रेम बनाम आधुनिक क्रूरता:
लेखक अपनी माँ की याद दिलाते हैं जो शाम को पेड़ के पत्ते तोड़ने से मना करती थीं क्योंकि ""पेड़ रोएँगे"" और दरिया (नदी) पर सलाम करने को कहती थीं। लेकिन आज स्थिति बदल गई है। लेखक के घर में कबूतर के दो अंडों में से एक बिल्ली ने तोड़ दिया, तो उनकी माँ ने उसे बचाने की कोशिश की, पर दूसरा अंडा उनके हाथ से गिरकर टूट गया। इस 'गुनाह' के प्रायश्चित के लिए माँ ने दिन भर रोजा रखा और नमाज़ पढ़कर रोती रहीं।
आज के समय में लोग खिड़कियों पर जाली लगवा देते हैं ताकि परिंदे अंदर न आ सकें। अब न तो वैसे लोग रहे, न वैसी संवेदना।
#Key Highlights
- जीवेषु दया (Empathy for all): पाठ का मूल संदेश सभी जीवों के प्रति दया और प्रेम भाव रखना है।
- प्रकृति का असंतुलन: मनुष्य की बढ़ती लालसा ने समुद्र और जंगलों को सीमित कर दिया है, जिससे प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं।
- धार्मिक सहिष्णुता: लेखक ने सुलेमान, नूह और कबीर जैसे विभिन्न धर्मों के प्रतीकों के माध्यम से 'इंसानियत' को सर्वोपरि बताया है।
- बदलती जीवनशैली: पुरानी पीढ़ी प्रकृति से जुड़ी थी, जबकि आधुनिक पीढ़ी प्रकृति को केवल उपभोग की वस्तु मानती है।
- भावुक प्रसंग: नूह का पछतावा, सुलेमान की चींटियों से बातचीत और माँ का कबूतर के अंडों के लिए रोना—ये प्रसंग हृदय को स्पर्श करते हैं।
- व्यंग्य: आज के फ्लैट-कल्चर और खिड़कियों पर लगी जालियों के माध्यम से समाज की संवेदनहीनता पर करारा व्यंग्य किया गया है।
#Hard Words
1. लश्कर (Lashkar): सेना / फौज
2. गनीमत (Ganeemat): संतोषजनक / सौभाग्य
3. मुहाना (Muhana): नदी या सागर का प्रवेश द्वार
4. वजूद (Wajood): अस्तित्व (Existence)
5. प्रायश्चित (Prayashchit): पछतावा (Repentance)
6. पौरुष (Paurush): पुरुषार्थ / मर्दानगी
7. मुसीबत (Musibat): संकट
8. तहज़ीब (Tehzeeb): संस्कृति / शिष्टाचार
9. बस्तियाँ (Bastiyan): रहने की जगह (Colonies)
10. नाफरमानी: आज्ञा न मानना
#Textbook Q&A
प्र 1: अरब में लश्कर को 'नूह' के नाम से क्यों याद किया जाता है?
उत्तर: अरब में लश्कर को 'नूह' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे उम्र भर रोते रहे (नूह का अर्थ है रोने वाला)। उनके रोने का कारण एक घायल कुत्ता था जिसे उन्होंने अपनी श्रेष्ठता के घमंड में दुत्कार दिया था। कुत्ते के तार्किक जवाब ने उनकी आँखें खोल दीं और उन्हें अपनी गलती का इतना गहरा पछतावा हुआ कि वे जीवन भर उस जीव की आत्मा को दुखाने के कारण रोते रहे।
प्र 2: सुलेमान ने चींटियों से क्या कहा?
उत्तर: जब सुलेमान ने चींटियों को डरकर भागते देखा, तो उन्होंने अपनी दयालुता दिखाते हुए कहा—""घबराओ नहीं, सुलेमान को खुदा ने सबका रखवाला बनाया है, मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ, बल्कि सबके लिए मोहब्बत हूँ।"" उन्होंने चींटियों को आश्वस्त किया कि उनकी सेना से किसी को कोई नुकसान नहीं होगा।
प्र 3: समुद्र के गुस्से का क्या कारण था? उसने अपना गुस्सा कैसे निकाला?
उत्तर: समुद्र के गुस्से का कारण यह था कि मनुष्य लगातार समुद्र की ज़मीन को हथिया रहा था और वहाँ इमारतें बना रहा था। समुद्र सिमटता जा रहा था। जब उसकी बर्दाश्त की सीमा समाप्त हो गई, तो उसने एक रात विकराल रूप धारण किया और अपनी लहरों से तीन जहाजों को बच्चों के खिलौनों की तरह तीन अलग-अलग दिशाओं में फेंक दिया। यह प्रकृति का मनुष्य को दिया गया एक सबक था।
प्र 4: लेखक की माँ ने कबूतर के अंडों के लिए क्या प्रायश्चित किया?
उत्तर: लेखक की माँ से कबूतर का दूसरा अंडा गलती से गिरकर टूट गया था। वे इस घटना को एक 'गुनाह' मान रही थीं। इस पाप के प्रायश्चित के लिए उन्होंने पूरे दिन का रोजा रखा, कुछ नहीं खाया-पिया और नमाज़ पढ़कर बार-बार खुदा से अपनी इस भूल के लिए माफी माँगती रहीं। उनकी आँखों से लगातार आँसू बहते रहे।
#Competency Based Q&A
1. (पर्यावरण संरक्षण): ""प्रकृति की सहनशक्ति की भी एक सीमा होती है।"" पाठ के आधार पर वर्तमान जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर टिप्पणी करें।
उत्तर: यह सत्य है कि प्रकृति सब कुछ सहती है, लेकिन जब सीमा पार हो जाती है, तो वह सुनामी या भूकंप के रूप में तांडव करती है। आज ग्लोबल वार्मिंग और असमय बारिश इसी असंतुलन का परिणाम है। हमने पशु-पक्षियों के घर (जंगल) छीन लिए, तो वे हमारी बस्तियों में आने लगे। यदि हम अभी भी नहीं सुधरे, तो समुद्र का वह गुस्सा जैसा पाठ में वर्णित है, पूरी सभ्यता को लील सकता है। हमें 'सह-अस्तित्व' (Co-existence) की भावना को पुनर्जीवित करना होगा।
2. (सामाजिक मूल्य): आज के अपार्टमेंट कल्चर में 'पड़ोस संस्कृति' और 'जीव दया' खत्म हो रही है। पाठ के आलोक में अपने विचार लिखें।
उत्तर: पहले लोग आँगन वाले घरों में रहते थे जहाँ गौरैया और कबूतर आसानी से घोंसला बना लेते थे। आज के फ्लैटों में हमने खिड़कियों पर जालियां लगवा दी हैं। हम नहीं चाहते कि कोई परिंदा हमारे सोफे गंदे करे। यह हमारी बढ़ती स्वार्थपरता को दर्शाता है। निदा फाज़ली जी ने सही कहा है कि अब वे लोग नहीं रहे जो दूसरों के दुख को अपना समझें। हमें बच्चों को फिर से प्रकृति और जीवों से प्रेम करना सिखाना होगा।
#Idioms
1. दीवारें खड़ी करना: (भेदभाव करना / अलग-अलग होना)
प्रयोग: इंसान ने कुदरत को बाँटकर आपस में दीवारें खड़ी कर ली हैं।
2. पसीने छूटना: (बहुत घबरा जाना)
प्रयोग: समुद्र का विकराल रूप देखकर मल्लाहों के पसीने छूट गए।
3. आड़े हाथों लेना: (खरी-खोटी सुनाना / सज़ा देना)
नोट: पाठ में प्रकृति के संदर्भ में भाव निहित है।
4. बेघर करना: (आवास छीन लेना)
प्रयोग: हमने जंगलों को काटकर परिंदों को बेघर कर दिया है।
#SDG Goal
SDG 15: Life on Land (स्थलीय जीवों की सुरक्षा):
लक्ष्य: जैव विविधता का संरक्षण।
विवरण: यह पाठ हमें सिखाता है कि धरती केवल मनुष्यों की नहीं है। हमें अन्य जीवों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उनके आवास (Habitat) को सुरक्षित रखना चाहिए।
#Worksheet
खंड क: बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. सुलेमान किसकी भाषा समझते थे?
(क) केवल मनुष्यों की
(ख) देवदूतों की
(ग) पशु-पक्षियों और चींटियों की
(घ) किसी की नहीं
2. नूह का असली नाम क्या था?
(क) लश्कर
(ख) सुलेमान
(ग) शेख अयाज़
(घ) कबीर
3. लेखक की माँ रात में क्या करने से मना करती थीं?
(क) खाना खाने से
(ख) पेड़ के पत्ते तोड़ने से
(ग) बाहर जाने से
(घ) सोने से
4. समुद्र ने तीन जहाजों को कहाँ फेंका था?
(क) वर्ली, बांद्रा और गेटवे ऑफ इंडिया
(ख) गोवा, मुंबई और केरल
(ग) नदी के पास
(घ) समुद्र के बीच में ही
5. शेख अयाज़ के पिता भोजन छोड़कर क्यों खड़े हो गए?
(क) खाना कड़वा था
(ख) उन्हें भूख नहीं थी
(ग) एक च्योंटे को उसके घर छोड़ने के लिए
(घ) किसी मेहमान के आने पर
खंड ख: रिक्त स्थान भरें
6. सुलेमान को खुदा ने सबका __________ बनाया है।
7. नूह __________ के कारण जीवन भर रोते रहे।
8. पहले पूरी दुनिया एक __________ की तरह थी।
9. लेखक के घर में __________ ने दो अंडे दिए थे।
10. प्रकृति के असंतुलन से __________ जैसे खतरे बढ़ गए हैं।
खंड ग: एक शब्द/वाक्य में उत्तर
11. 'नूह' का अर्थ क्या है?
12. शेख अयाज़ किस भाषा के कवि थे?
13. लेखक की माँ ने किस 'गुनाह' के लिए रोजा रखा?
14. सुलेमान का लश्कर कहाँ से गुजर रहा था?
15. कुत्ते ने नूह को क्या जवाब दिया?
खंड घ: लघु उत्तरीय प्रश्न (20-30 शब्द)
16. चींटियाँ सुलेमान की फौज को देखकर क्यों डर गईं?
17. नूह के पछतावे का कारण क्या था?
18. समुद्र के सिमटने का क्या कारण है?
19. लेखक की माँ पक्षियों के प्रति कैसी संवेदना रखती थीं?
20. आज के घरों में पक्षियों के आने पर क्या पाबंदी लगाई जाती है?
खंड ङ: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (40-50 शब्द)
21. 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें।
22. प्रकृति के संतुलन बिगड़ने का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
23. शेख अयाज़ के पिता के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहते हैं?
24. नूह और कुत्ते के संवाद का धार्मिक और मानवीय महत्व स्पष्ट करें।
25. इस पाठ से मिलने वाली किन्हीं दो मुख्य शिक्षाओं का उल्लेख करें।
खंड च: योग्यता आधारित प्रश्न
26. यदि आप सुलेमान की जगह होते, तो चींटियों के प्रति क्या व्यवहार करते?
27. क्या हम विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश कर रहे हैं? तर्क दें।
28. ""जीवों के प्रति दया ही असली धर्म है।""—इस कथन पर अपने विचार लिखें।
29. निदा फाज़ली की भाषा शैली की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख करें।
30. वर्तमान समय में हम पशु-पक्षियों की सहायता कैसे कर सकते हैं?
#Board PYQs
Year: 2018, 2023
Ans: जब सुलेमान की सेना गुजर रही थी, तो चींटियाँ डरकर बिलों में छिपने लगीं। सुलेमान ने उनसे कहा— ""डरो मत, मैं खुदा का नेक बंदा हूँ और सबके लिए रहमत (दया) लेकर आया हूँ।"" उन्होंने आश्वासन दिया कि वे केवल इंसानों के ही नहीं, बल्कि सभी बेज़ुबान जानवरों के भी रक्षक हैं। यह उनकी महानता को दर्शाता है।
Q2: बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा है?
Year: 2019, 2022
Ans: बढ़ती आबादी के कारण मनुष्यों ने समुद्र को पीछे धकेलना, जंगलों को काटना और पहाड़ों को तोड़ना शुरू कर दिया है। पशु-पक्षियों के रहने के स्थान (घोंसले) नष्ट हो गए हैं। प्रदूषण बढ़ रहा है और प्रकृति का संतुलन बिगड़ने से बेमौसम बारिश, तूफ़ान और भूकंप जैसी आपदाएँ आ रही हैं। प्रकृति अब मनुष्य के लालच को सहने में असमर्थ हो रही है।
Q3: लेखक की माँ परिंदों (पक्षियों) के प्रति कैसी संवेदना रखती थीं?
Year: 2017, 2021
Ans: लेखक की माँ बहुत दयालु थीं। वे शाम को पेड़ों से पत्ते तोड़ने को मना करती थीं क्योंकि पेड़ रोते हैं। वे दरिया (नदी) को सलाम करने और पक्षियों को दाना डालने को कहती थीं। जब उनके घर में कबूतर का अंडा टूट गया, तो उन्होंने पश्चाताप के लिए पूरे दिन का रोजा रखा और खुदा से माफ़ी माँगी।
Q4: कबूतरों के परेशानी में फड़फड़ाने का क्या कारण था? लेखक की पत्नी ने क्या किया?
Year: 2020, 2024 (Sample)
Ans: लेखक के घर की खिड़की में कबूतरों ने घोंसला बनाया था, जहाँ बिल्ली ने उनके अंडे तोड़ दिए थे। कबूतर अपने बच्चों को खोकर पीड़ा में फड़फड़ा रहे थे। लेखक की पत्नी ने संवेदना दिखाने के बजाय खिड़की में जाली लगवा दी ताकि वे अंदर न आ सकें। यह बदलते समय में मनुष्य की घटती संवेदना का प्रतीक है।
Q5: ""नदियाँ सींचें खेत को, फल बँटवाएँ आम"" - इस दोहे का आशय स्पष्ट करें।
Value Based / Competency
Ans: यह दोहा प्रकृति के परोपकारी स्वभाव को दर्शाता है। नदियाँ खुद अपना पानी नहीं पीतीं, वे खेतों को सींचती हैं। पेड़ अपने फल खुद नहीं खाते, वे दूसरों को देते हैं। लेखक यह संदेश देना चाहते हैं कि पहले दुनिया एक परिवार जैसी थी जहाँ हर जीव एक-दूसरे का ख्याल रखता था, लेकिन अब मनुष्य स्वार्थी हो गया है।