PADHNA LIKHNA

Pariksha (परीक्षा)

#Detailed Summary

विस्तृत सारांश (Detailed Summary):

यह कहानी कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित एक अत्यंत प्रभावशाली और जीवन-दर्शन से भरपूर रचना है। यह कहानी हमें सिखाती है कि व्यक्ति की असली योग्यता उसकी डिग्रियों या ज्ञान में नहीं, बल्कि उसके मानवीय गुणों, दया और साहस में छिपी होती है।

1. दीवान पद की रिक्तता:
देवगढ़ रियासत के दीवान, सुजान सिंह, अब बूढ़े हो गए थे। उन्होंने महाराज से विनती की कि वे पद से मुक्त होना चाहते हैं ताकि अपना अंतिम समय ईश्वर भक्ति में लगा सकें। राजा सुजान सिंह को बहुत मानते थे, इसलिए उन्होंने एक शर्त रखी—दीवान जी को स्वयं अपने जैसा ही एक योग्य, ईमानदार और कर्तव्यपरायण उत्तराधिकारी (नया दीवान) ढूँढना होगा।

2. उम्मीदवारों का आगमन और बनावटी व्यवहार:
अखबारों में विज्ञापन दिया गया। विज्ञापन की शर्त अनोखी थी—उम्मीदवार का बहुत विद्वान होना ज़रूरी नहीं था, लेकिन उसका नेक दिल होना अनिवार्य था। रियासत में देश भर से सैकड़ों उम्मीदवार उमड़ पड़े। सुजान सिंह ने उन्हें एक महीने तक महल में मेहमान बनाकर रखा। सभी उम्मीदवार जानते थे कि उन पर नज़र रखी जा रही है, इसलिए हर कोई खुद को सर्वश्रेष्ठ दिखाने का नाटक कर रहा था। जो लोग असलियत में नास्तिक थे, वे भी सुबह-शाम मंदिर में पूजा करते थे। हर कोई बहुत सभ्य और दयालु होने का स्वांग रच रहा था।

3. असली परीक्षा (हॉकी का खेल और फँसी हुई गाड़ी):
महीना खत्म होने को था। एक दिन सुजान सिंह ने उम्मीदवारों के बीच हॉकी के खेल का आयोजन किया। खेल के बाद सभी उम्मीदवार बुरी तरह थक चुके थे और शाम के अँधेरे में घर लौट रहे थे। रास्ते में एक नाले के कीचड़ में एक गरीब किसान की अनाज से भरी बैलगाड़ी फँस गई थी। किसान (जो वास्तव में वेश बदलकर स्वयं सुजान सिंह थे) ने वहाँ से गुजरने वाले हर उम्मीदवार से मदद माँगी, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। सब उसे अनसुना कर आगे बढ़ गए।

4. जानकीनाथ का साहस और मानवता:
तभी उम्मीदवार पंडित जानकीनाथ वहाँ से गुज़रे। वे खुद खेल में घायल थे और उनके पैर में चोट थी। लेकिन किसान की लाचारी देखकर उनका दिल पसीज गया। उन्होंने अपनी चोट और थकान की परवाह नहीं की। उन्होंने कीचड़ में उतरकर पहिये को अपने कंधों का ज़ोर लगाकर धक्का दिया। उनकी मेहनत रंग लाई और गाड़ी नाले से बाहर निकल आई। किसान ने उन्हें बहुत आशीर्वाद दिया। जानकीनाथ को यह नहीं पता था कि उन्होंने आज अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा पास कर ली है।

5. परिणाम और घोषणा:
अगले दिन दरबार लगा। सुजान सिंह ने घोषणा की कि रियासत का नया दीवान पंडित जानकीनाथ होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दीवान के लिए जो आत्मबल, साहस और गरीबों के प्रति संवेदना चाहिए, वह केवल जानकीनाथ में दिखी। उन्होंने साबित किया कि जिसके हृदय में गरीबों के लिए दर्द है, वही ऊँचे पद के योग्य है।

#Key Highlights

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • परोपकार की कसौटी: प्रेमचंद ने दिखाया है कि किसी भी पद की योग्यता का आधार किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि परोपकार की भावना है।
  • ढोंग का पर्दाफाश: समाज में लोग अक्सर अच्छा दिखने का मुखौटा पहनते हैं, लेकिन संकट के समय ही उनकी असलियत सामने आती है।
  • हृदय की विशालता: जानकीनाथ का चरित्र 'स्वार्थ' और 'परमार्थ' के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है।
  • मनोवैज्ञानिक परीक्षा: सुजान सिंह ने उम्मीदवारों को कोई लिखित परीक्षा नहीं दी, बल्कि उन्हें एक 'रियल लाइफ सिचुएशन' (वास्तविक स्थिति) में डालकर परखा।
  • श्रम की महिमा: एक ब्राह्मण (पंडित) होने के बावजूद जानकीनाथ ने कीचड़ में उतरकर काम करने को छोटा नहीं समझा, जो उनकी उच्च सोच को दर्शाता है।
  • संदेश: सत्ता और शक्ति उन्हीं के हाथों में होनी चाहिए जिनके पास दूसरों का दुख महसूस करने वाला हृदय हो।

#Hard Words

कठिन शब्द और उनके अर्थ:

1. रियासत (Riyasat): राज्य / स्टेट
2. सुजान (Sujan): चतुर / समझदार / बुद्धिमान
3. उम्मीदवार (Ummeedwar): प्रार्थी / कैंडिडेट
4. सामर्थ्य (Samarthya): शक्ति / योग्यता / क्षमता
5. उद्धार (Uddhar): कल्याण / भलाई
6. मर्म (Marm): गहरा अर्थ / हृदय का रहस्य
7. स्वांग (Swang): नाटक / बनावट / वेश बदलना
8. कर्तव्यपरायण (Kartavyaparayan): अपने फर्ज़ को पूरी निष्ठा से निभाने वाला
9. संवेदना (Sanvedna): सहानुभूति / दूसरों का दुख महसूस करना
10. कुलीन (Kuleen): अच्छे खानदान का / ऊँचे वंश का
11. अडिग (Adig): जो अपने स्थान या निर्णय से न डिगे
12. विवशता (Vivashta): लाचारी / मजबूरी

#Idioms

मुहावरे (Idioms) और उनका प्रयोग:

1. आँखों में धूल झोंकना: (धोखा देना)
वाक्य: ढोंगी उम्मीदवार सुजान सिंह की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहे थे।

2. किस्मत चमकना: (भाग्य खुल जाना)
वाक्य: जानकीनाथ की नेकदिली के कारण उनकी किस्मत चमक गई और वे दीवान बन गए।

3. पसीने-पसीने होना: (बहुत अधिक थक जाना या मेहनत करना)
वाक्य: गाड़ी को कीचड़ से निकालने में जानकीनाथ पसीने-पसीने हो गए।

4. दंग रह जाना: (बहुत अधिक हैरान होना)
वाक्य: जब सुजान सिंह ने किसान का वेश हटाया, तो सब दंग रह गए।

5. हाथ मलना: (पछताना)
वाक्य: बाकी उम्मीदवार अवसर खोने के बाद हाथ मलते रह गए।

#Textbook Q&A

विस्तृत प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A):

प्र 1: सुजान सिंह ने राजा से क्या प्रार्थना की और राजा ने क्या शर्त रखी?
उत्तर: देवगढ़ के दीवान सुजान सिंह ने राजा से प्रार्थना की कि वे अब वृद्ध हो चुके हैं और उनकी शारीरिक शक्ति कम हो गई है। वे अपने शेष जीवन को शांतिपूर्वक ईश्वर की भक्ति में व्यतीत करना चाहते हैं, इसलिए उन्हें पद से मुक्त (Retire) कर दिया जाए। राजा ने उनकी सेवा को देखते हुए यह शर्त रखी कि उन्हें जाने से पहले स्वयं अपने जैसा ही कोई योग्य, दयालु और न्यायप्रिय व्यक्ति ढूँढकर रियासत को सौंपना होगा।

प्र 2: उम्मीदवारों की परीक्षा किस प्रकार ली गई? विस्तार से लिखें।
उत्तर: उम्मीदवारों की परीक्षा लेने का तरीका बहुत ही व्यावहारिक और अनोखा था। सुजान सिंह ने उम्मीदवारों को एक महीने तक महल में रखा जहाँ उन्हें हर सुख-सुविधा दी गई। उन्होंने उन पर कोई कड़ा पहरा नहीं बिठाया, बल्कि गुप्त रूप से उनकी आदतों, चरित्र और दूसरों के प्रति उनके व्यवहार को परखा। असली परीक्षा तब हुई जब 'हॉकी के खेल' के बाद जानबूझकर एक बैलगाड़ी को नाले में फँसाया गया। सुजान सिंह यह देखना चाहते थे कि थकान और अपनी जीत-हार के बीच कौन सा उम्मीदवार अपनी स्वार्थ छोड़कर एक गरीब की मदद के लिए आगे आता है।

प्र 3: जानकीनाथ ने किसान की मदद किस प्रकार की?
उत्तर: पंडित जानकीनाथ हॉकी के खेल के बाद काफी थक चुके थे और उनके पैर में चोट भी लगी थी। लेकिन जब उन्होंने नाले के पास एक किसान को विवश और परेशान देखा, तो वे चुपचाप नहीं रह सके। उन्होंने अपने कपड़ों की परवाह नहीं की और कीचड़ में उतर गए। उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाकर गाड़ी के पहिये को ऊपर उठाया और बैलों को हांका। उनकी इस निस्वार्थ सेवा और शारीरिक बल के कारण भारी गाड़ी नाले से बाहर निकल आई।

प्र 4: सुजान सिंह के अनुसार दीवान पद के लिए कौन-से गुण सबसे महत्वपूर्ण थे?
उत्तर: सुजान सिंह का मानना था कि दीवान जैसे ऊँचे पद पर बैठने वाले व्यक्ति में केवल विद्वत्ता (Education) काफी नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं—दया, उदारता, आत्मबल और अदम्य साहस। उनके अनुसार, जिस व्यक्ति के हृदय में गरीबों के लिए करुणा है और जो संकट के समय अपनी जान या स्वार्थ की परवाह किए बिना दूसरों की मदद कर सके, वही व्यक्ति न्याय के आसन पर बैठने के योग्य है।

#Competency Based Q&A

योग्यता आधारित प्रश्न (Competency Based Questions):

1. (मूल्य - नैतिकता): ""किसी व्यक्ति की डिग्रियाँ उसके चरित्र का प्रमाण नहीं हो सकतीं।"" इस कहानी के संदर्भ में इस कथन की विवेचना करें। (250-300 शब्द)
उत्तर: प्रेमचंद की कहानी 'परीक्षा' इस सत्य को बहुत प्रभावशाली ढंग से उजागर करती है। विज्ञापन पढ़कर रियासत में सैकड़ों उम्मीदवार आए थे, जिनमें बड़े-बड़े विद्वान, पंडित और डिग्रियों वाले लोग शामिल थे। यदि परीक्षा लिखित होती, तो शायद कोई भी विद्वान दीवान बन जाता।

लेकिन सुजान सिंह जानते थे कि शासन चलाने के लिए केवल दिमाग नहीं, बल्कि हृदय की भी ज़रूरत होती है। कई उम्मीदवार ऐसे थे जो बहुत पढ़े-लिखे थे, लेकिन जब नाले में गाड़ी फँसी किसान की मदद की बात आई, तो उनका ज्ञान धरा का धरा रह गया। वे अपने कपड़े गंदे नहीं करना चाहते थे या अपनी थकान नहीं मिटाना चाहते थे।

इसके विपरीत, जानकीनाथ ने अपनी शिक्षा का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि अपने संस्कारों का परिचय दिया। शिक्षा हमें यह सिखा सकती है कि ""मदद करनी चाहिए"", लेकिन चरित्र हमें ""मदद करने पर मजबूर"" करता है। आज के समाज में भी हम देखते हैं कि उच्च शिक्षित लोग कई बार भ्रष्टाचार या असंवेदनशीलता दिखाते हैं। अतः, असली शिक्षा वही है जो मनुष्य को संवेदनशील और साहसी बनाए। जानकीनाथ की 'डिग्री' उनका वह कर्म था जो उन्होंने कीचड़ में उतरकर किया।

2. (मनोविज्ञान): सुजान सिंह ने 'हॉकी के खेल' को ही परीक्षा का माध्यम क्यों चुना? (200-250 शब्द)
उत्तर: सुजान सिंह एक चतुर पारखी थे। वे जानते थे कि खेल का मैदान इंसान के असली स्वभाव को बाहर लाने की सबसे अच्छी जगह है।
1. धैर्य और सहनशीलता: खेल में जब हार और जीत की स्थिति आती है, तो व्यक्ति का असली चेहरा सामने आता है। कोई गुस्से में आ जाता है, तो कोई धैर्य रखता है।
2. अनुशासन: खेल यह दिखाता है कि व्यक्ति नियमों का कितना पालन करता है।
3. थकान की परीक्षा: खेल के बाद जब शरीर और मन थक जाता है, तब इंसान के अंदर का 'मुखौटा' गिर जाता है। थका हुआ व्यक्ति अक्सर चिड़चिड़ा हो जाता है और दूसरों की मदद करने से कतराता है।
सुजान सिंह ने जानबूझकर खेल के बाद गाड़ी फँसाई ताकि वे देख सकें कि खेल की भावना मैदान तक ही सीमित है या वह जीवन के व्यवहार में भी उतरती है। जानकीनाथ ने घायल होने के बावजूद मदद की, जिससे सिद्ध हुआ कि उनकी खेल भावना और दया बनावटी नहीं थी।

3. (नेतृत्व - Leadership): एक अच्छे नेता या दीवान में कौन-कौन से गुण होने चाहिए? आज के संदर्भ में लिखें। (200 शब्द)
उत्तर: कहानी के आधार पर और आज के लोकतंत्र के संदर्भ में, एक अच्छे नेता (Leader) में निम्नलिखित गुण होने चाहिए:
1. जवाबदेही (Accountability): उसे जनता के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए, जैसे सुजान सिंह ने पद छोड़ते समय रियासत के भविष्य की चिंता की।
2. सहानुभूति (Empathy): उसे ज़मीनी हकीकत का पता होना चाहिए और गरीबों का दर्द महसूस होना चाहिए।
3. साहस (Courage): कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने और खुद आगे बढ़कर नेतृत्व करने का साहस होना चाहिए।
4. सादगी: पद का घमंड न हो, वह एक सामान्य नागरिक (किसान) की मदद के लिए कीचड़ में भी उतर सके।
आज हमें ऐसे ही नेताओं की ज़रूरत है जो 'जनता के सेवक' हों, न कि 'जनता के स्वामी'।

#SDG Goal

SDG 8: Decent Work and Economic Growth (मर्यादित कार्य और आर्थिक विकास)
विवरण: यह पाठ 'गुणों के आधार पर चयन' (Merit-based selection) को बढ़ावा देता है। यह सिखाता है कि कार्यस्थल पर केवल तकनीकी योग्यता नहीं, बल्कि नैतिक योग्यता भी ज़रूरी है, जो एक स्वस्थ कार्य-संस्कृति और देश के विकास के लिए अनिवार्य है।

SDG 16: Peace, Justice and Strong Institutions (शांति, न्याय और सशक्त संस्थाएँ)
विवरण: एक न्यायप्रिय दीवान का चयन एक मज़बूत प्रशासनिक संस्था (Strong Institution) की नींव रखता है। जानकीनाथ जैसे लोगों का नेतृत्व ही समाज में वास्तविक न्याय और शांति सुनिश्चित कर सकता है।

#Worksheet

Worksheet: Chapter 10 - Pariksha

Section A: एक शब्द में उत्तर दें (One Word Answer)
1. देवगढ़ रियासत के दीवान का नाम क्या था?
2. परीक्षा कहानी के लेखक कौन हैं?
3. दीवान पद के लिए कौन सा खेल आयोजित किया गया?
4. गाड़ी कहाँ फँस गई थी?
5. अंत में दीवान किसे चुना गया?

Section B: रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (Fill in the blanks)
6. सुजान सिंह ने राजा से __________ की विनती की।
7. उम्मीदवार एक महीने तक __________ बनकर रहे।
8. किसान के वेश में स्वयं __________ थे।
9. जानकीनाथ के __________ में चोट लगी थी।
10. दीवान पद के लिए __________ और __________ जैसे गुणों की आवश्यकता थी।

Section C: सही या गलत (True or False)
11. सुजान सिंह बहुत बेईमान व्यक्ति थे। ( )
12. विज्ञापन में एम.ए. पास होना अनिवार्य था। ( )
13. सभी उम्मीदवार दिखावा कर रहे थे। ( )
14. जानकीनाथ ने किसान की मदद की। ( )
15. राजा ने स्वयं उम्मीदवार का चुनाव किया। ( )

Section D: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answers)
16. विज्ञापन में उम्मीदवार के लिए क्या शर्त थी?
17. उम्मीदवार सुबह-शाम कहाँ जाते थे?
18. जानकीनाथ को दीवान क्यों चुना गया?
19. सुजान सिंह ने किसान का वेश क्यों बनाया था?
20. 'उम्मीदवार' शब्द का अर्थ लिखिए।

Section E: लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answers)
21. सुजान सिंह दीवान पद क्यों छोड़ना चाहते थे?
22. उम्मीदवारों ने एक महीने तक अपने स्वभाव को कैसे छिपाया?
23. हॉकी के खेल के बाद उम्मीदवारों की क्या स्थिति थी?
24. किसान की बैलगाड़ी क्यों नहीं निकल पा रही थी?
25. इस कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

Section F: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answers)
26. जानकीनाथ द्वारा किसान की मदद करने के दृश्य का वर्णन करें।
27. ""दीवान वह है जिसके दिल में गरीबों के लिए दर्द हो"" - सुजान सिंह के इस कथन को स्पष्ट करें।
28. यदि सुजान सिंह ने यह परीक्षा न ली होती, तो क्या होता? कल्पना करें।
29. मुंशी प्रेमचंद की कहानियों की किन्हीं दो विशेषताओं के बारे में लिखें।
30. अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का वर्णन करें जहाँ आपने किसी अनजान व्यक्ति की मदद की हो।