#Detailed Summary
विस्तृत सारांश (Detailed Summary):
यह पाठ एक निबंध (Essay) है जो भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नृत्य कलाओं का परिचय देता है। लेखिका जया मेहता ने इस पाठ में असम के दो प्रमुख नृत्यों—'बिहू' (लोक नृत्य) और 'सत्रिया' (शास्त्रीय नृत्य) का बहुत ही सुंदर और ज्ञानवर्धक वर्णन किया है।
1. असम की पहचान: बिहू नृत्य (Bihu Dance):
बिहू असम का सबसे लोकप्रिय त्यौहार और नृत्य है। यह असम की आत्मा है। बिहू केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह असम के कृषि चक्र (Farming Cycle) से गहराई से जुड़ा हुआ है। साल में तीन बिहू मनाए जाते हैं:
बिहू नृत्य खुले मैदानों में किया जाता है। इसमें ढोल, पेपा (भैंस के सींग से बना वाद्य) और ताल जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है।
2. भक्ति का रूप: सत्रिया नृत्य (Sattriya Dance):
सत्रिया असम का एक प्राचीन शास्त्रीय नृत्य (Classical Dance) है। इसकी शुरुआत लगभग 500 साल पहले महान वैष्णव संत और समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव (Srimanta Sankardev) ने की थी।
शंकरदेव ने धर्म और ईश्वर की भक्ति को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए इस नृत्य की रचना की थी। पहले यह नृत्य केवल 'सत्रों' (मठों/आश्रमों) में पुरुष भिक्षुओं (जिन्हें 'भोकोट' कहते हैं) द्वारा किया जाता था। इसका उद्देश्य मनोरंजन नहीं, बल्कि ईश्वर की आराधना था। लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव आए। अब इसे मंच (Stage) पर भी प्रस्तुत किया जाता है और महिलाएँ भी इसमें भाग लेती हैं।
3. शास्त्रीय दर्जा और महत्व:
वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी ने सत्रिया को भारत के 8 प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों में शामिल किया। यह असम के लिए बहुत गर्व की बात थी। पाठ में बताया गया है कि जहाँ बिहू समाज को जोड़ता है और प्रकृति का उत्सव मनाता है, वहीं सत्रिया आध्यात्मिकता और शांति का मार्ग दिखाता है। दोनों नृत्यों की वेशभूषा, मुद्राएँ (Steps) और संगीत अलग-अलग होते हुए भी ये असम की मिली-जुली संस्कृति (Composite Culture) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यह पाठ एक निबंध (Essay) है जो भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नृत्य कलाओं का परिचय देता है। लेखिका जया मेहता ने इस पाठ में असम के दो प्रमुख नृत्यों—'बिहू' (लोक नृत्य) और 'सत्रिया' (शास्त्रीय नृत्य) का बहुत ही सुंदर और ज्ञानवर्धक वर्णन किया है।
1. असम की पहचान: बिहू नृत्य (Bihu Dance):
बिहू असम का सबसे लोकप्रिय त्यौहार और नृत्य है। यह असम की आत्मा है। बिहू केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह असम के कृषि चक्र (Farming Cycle) से गहराई से जुड़ा हुआ है। साल में तीन बिहू मनाए जाते हैं:
- बोहाग बिहू (रंगली बिहू): यह अप्रैल (वसंत ऋतु) में मनाया जाता है। यह नए साल की शुरुआत और बुवाई के मौसम का प्रतीक है। इसमें युवक-युवतियाँ रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर खुशी से नाचते हैं।
- काति बिहू (कंगली बिहू): यह अक्टूबर में मनाया जाता है जब फसल पकने वाली होती है। यह प्रार्थना का समय होता है, इसलिए इसमें उल्लास कम होता है।
- माघ बिहू (भोगली बिहू): यह जनवरी में फसल कटने के बाद मनाया जाता है। यह खाने-पीने और जश्न मनाने का त्यौहार है।
बिहू नृत्य खुले मैदानों में किया जाता है। इसमें ढोल, पेपा (भैंस के सींग से बना वाद्य) और ताल जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है।
2. भक्ति का रूप: सत्रिया नृत्य (Sattriya Dance):
सत्रिया असम का एक प्राचीन शास्त्रीय नृत्य (Classical Dance) है। इसकी शुरुआत लगभग 500 साल पहले महान वैष्णव संत और समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव (Srimanta Sankardev) ने की थी।
शंकरदेव ने धर्म और ईश्वर की भक्ति को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए इस नृत्य की रचना की थी। पहले यह नृत्य केवल 'सत्रों' (मठों/आश्रमों) में पुरुष भिक्षुओं (जिन्हें 'भोकोट' कहते हैं) द्वारा किया जाता था। इसका उद्देश्य मनोरंजन नहीं, बल्कि ईश्वर की आराधना था। लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव आए। अब इसे मंच (Stage) पर भी प्रस्तुत किया जाता है और महिलाएँ भी इसमें भाग लेती हैं।
3. शास्त्रीय दर्जा और महत्व:
वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी ने सत्रिया को भारत के 8 प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों में शामिल किया। यह असम के लिए बहुत गर्व की बात थी। पाठ में बताया गया है कि जहाँ बिहू समाज को जोड़ता है और प्रकृति का उत्सव मनाता है, वहीं सत्रिया आध्यात्मिकता और शांति का मार्ग दिखाता है। दोनों नृत्यों की वेशभूषा, मुद्राएँ (Steps) और संगीत अलग-अलग होते हुए भी ये असम की मिली-जुली संस्कृति (Composite Culture) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
#Key Highlights
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- दो मुख्य नृत्य: पाठ में बिहू (Folk) और सत्रिया (Classical) के बीच के अंतर और महत्व को समझाया गया है।
- कृषि से जुड़ाव: बिहू त्यौहार पूरी तरह से खेती-बाड़ी (बुवाई, सुरक्षा और कटाई) पर आधारित है, जो मनुष्य और प्रकृति के रिश्ते को दर्शाता है।
- शंकरदेव का योगदान: श्रीमंत शंकरदेव ने 15वीं शताब्दी में 'सत्रिया' नृत्य और 'अंकिया नाट' (नाटक) के जरिए भक्ति आंदोलन को मजबूत किया।
- वाद्य यंत्र: बिहू में 'पेपा' (Pepa) और 'ढोल' का विशेष महत्व है, जबकि सत्रिया में 'खोल' (Khol) और 'ताल' (Cymbal) का प्रयोग होता है।
- स्थान: बिहू खुले प्रकृति के बीच किया जाता है, जबकि सत्रिया मूल रूप से मंदिरों और मठों की पवित्रता में किया जाता था।
- सामाजिक समरसता: ये नृत्य जाति और धर्म के भेदभाव को मिटाकर सभी लोगों को एक साथ लाते हैं।
- सांस्कृतिक धरोहर: सत्रिया को शास्त्रीय नृत्य का दर्जा मिलना भारतीय संस्कृति की विविधता (Diversity) का प्रमाण है।
#Hard Words
कठिन शब्द और उनके अर्थ:
1. लोक नृत्य (Folk Dance): आम लोगों का पारंपरिक नाच जो किसी विशेष क्षेत्र की संस्कृति को दर्शाता है।
2. शास्त्रीय नृत्य (Classical Dance): वह नृत्य जो कठिन नियमों, शास्त्रों और विशेष प्रशिक्षण (Training) पर आधारित होता है।
3. उल्लास (Ullas): बहुत अधिक खुशी / हर्ष
4. परंपरा (Parampara): पुराने समय से चली आ रही रीति-रिवाज
5. मुद्राएँ (Mudrayen): नृत्य करते समय हाथ, चेहरे और शरीर के विशेष भाव या संकेत
6. वाद्य यंत्र (Vadya Yantra): संगीत बजाने के उपकरण (Musical Instruments)
7. विरासत (Virasat): पूर्वजों से मिली हुई संपत्ति या संस्कृति (Heritage)
8. सत्र (Satra): असम के वैष्णव मठ या आश्रम जहाँ भक्त रहते हैं
9. आराधना (Aaradhana): पूजा / भक्ति
10. समावेश (Samavesh): शामिल करना / मिलाना
11. अद्वितीय (Advitiya): जिसके जैसा दूसरा कोई न हो / अनोखा
1. लोक नृत्य (Folk Dance): आम लोगों का पारंपरिक नाच जो किसी विशेष क्षेत्र की संस्कृति को दर्शाता है।
2. शास्त्रीय नृत्य (Classical Dance): वह नृत्य जो कठिन नियमों, शास्त्रों और विशेष प्रशिक्षण (Training) पर आधारित होता है।
3. उल्लास (Ullas): बहुत अधिक खुशी / हर्ष
4. परंपरा (Parampara): पुराने समय से चली आ रही रीति-रिवाज
5. मुद्राएँ (Mudrayen): नृत्य करते समय हाथ, चेहरे और शरीर के विशेष भाव या संकेत
6. वाद्य यंत्र (Vadya Yantra): संगीत बजाने के उपकरण (Musical Instruments)
7. विरासत (Virasat): पूर्वजों से मिली हुई संपत्ति या संस्कृति (Heritage)
8. सत्र (Satra): असम के वैष्णव मठ या आश्रम जहाँ भक्त रहते हैं
9. आराधना (Aaradhana): पूजा / भक्ति
10. समावेश (Samavesh): शामिल करना / मिलाना
11. अद्वितीय (Advitiya): जिसके जैसा दूसरा कोई न हो / अनोखा
#Idioms
मुहावरे (Idioms):
इस पाठ में मुहावरों का विशेष प्रयोग नहीं हुआ है क्योंकि यह एक सूचनात्मक (Informative) निबंध है। फिर भी, कुछ वाक्यांशों का प्रयोग मुहावरे की तरह किया जा सकता है:
1. मन मोह लेना: (आकर्षित करना)
वाक्य: बिहू नृत्य की धुन ने सबका मन मोह लिया।
2. चार चाँद लगाना: (शोभा बढ़ाना)
वाक्य: रंग-बिरंगी वेशभूषा ने नृत्य में चार चाँद लगा दिए।
3. परंपरा निभाना: (रीति-रिवाज का पालन करना)
वाक्य: असम के लोग आज भी अपनी पुरानी परंपरा पूरी निष्ठा से निभाते हैं।
इस पाठ में मुहावरों का विशेष प्रयोग नहीं हुआ है क्योंकि यह एक सूचनात्मक (Informative) निबंध है। फिर भी, कुछ वाक्यांशों का प्रयोग मुहावरे की तरह किया जा सकता है:
1. मन मोह लेना: (आकर्षित करना)
वाक्य: बिहू नृत्य की धुन ने सबका मन मोह लिया।
2. चार चाँद लगाना: (शोभा बढ़ाना)
वाक्य: रंग-बिरंगी वेशभूषा ने नृत्य में चार चाँद लगा दिए।
3. परंपरा निभाना: (रीति-रिवाज का पालन करना)
वाक्य: असम के लोग आज भी अपनी पुरानी परंपरा पूरी निष्ठा से निभाते हैं।
#Textbook Q&A
विस्तृत प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A):
प्र 1: बिहू साल में कितनी बार मनाया जाता है और उनके नाम क्या हैं?
उत्तर: बिहू असम का प्रमुख त्यौहार है जो साल में तीन बार मनाया जाता है। ये तीनों खेती के अलग-अलग चरणों से जुड़े हैं:
1. बोहाग बिहू (रंगली): यह अप्रैल के मध्य में नए साल और वसंत ऋतु के स्वागत में मनाया जाता है।
2. काति बिहू (कंगली): यह अक्टूबर (कार्तिक) में मनाया जाता है। इस समय अन्न के भंडार खाली होते हैं, इसलिए लोग तुलसी के पौधे के पास दीया जलाकर अच्छी फसल की प्रार्थना करते हैं।
3. माघ बिहू (भोगली): यह जनवरी (मकर संक्रांति) में मनाया जाता है। यह फसल कटाई का उत्सव है, जिसमें लोग दावत (Feast) करते हैं।
प्र 2: सत्रिया नृत्य की शुरुआत किसने और कब की थी?
उत्तर: सत्रिया नृत्य की शुरुआत महान वैष्णव संत और समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव ने की थी। उन्होंने लगभग 500 वर्ष पूर्व (15वीं शताब्दी में) इस नृत्य शैली का विकास किया था। उनका उद्देश्य भक्ति आंदोलन को बढ़ाना और लोगों को ईश्वर (कृष्ण) की लीलाओं से जोड़ना था। उन्होंने नृत्य और नाटक (अंकिया नाट) को धर्म प्रचार का माध्यम बनाया।
प्र 3: 'पेपा' क्या है और यह किस नृत्य में प्रयोग होता है?
उत्तर: 'पेपा' असम का एक बहुत ही प्रसिद्ध और पारंपरिक वाद्य यंत्र (Musical Instrument) है। इसे भैंस के सींग (Buffalo Horn) से बनाया जाता है। इसकी आवाज़ बहुत तीखी और सुरीली होती है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से बिहू नृत्य में किया जाता है। पेपा की धुन सुनते ही असम के लोग थिरकने पर मजबूर हो जाते हैं।
प्र 4: लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य में क्या अंतर है?
उत्तर:
लोक नृत्य (Folk Dance): यह आम लोगों द्वारा खुशी के मौकों (शादी, त्यौहार) पर किया जाता है। इसमें कोई कड़े नियम नहीं होते। इसे कोई भी आसानी से सीख सकता है। उदाहरण: बिहू, भांगड़ा।
शास्त्रीय नृत्य (Classical Dance): यह प्राचीन शास्त्रों (नट्यशास्त्र) पर आधारित होता है। इसमें हाथ की मुद्राओं, चेहरे के भावों और पैरों की ताल के कड़े नियम होते हैं। इसे सीखने के लिए गुरु से लंबा प्रशिक्षण (Training) लेना पड़ता है। उदाहरण: सत्रिया, भरतनाट्यम।
प्र 1: बिहू साल में कितनी बार मनाया जाता है और उनके नाम क्या हैं?
उत्तर: बिहू असम का प्रमुख त्यौहार है जो साल में तीन बार मनाया जाता है। ये तीनों खेती के अलग-अलग चरणों से जुड़े हैं:
1. बोहाग बिहू (रंगली): यह अप्रैल के मध्य में नए साल और वसंत ऋतु के स्वागत में मनाया जाता है।
2. काति बिहू (कंगली): यह अक्टूबर (कार्तिक) में मनाया जाता है। इस समय अन्न के भंडार खाली होते हैं, इसलिए लोग तुलसी के पौधे के पास दीया जलाकर अच्छी फसल की प्रार्थना करते हैं।
3. माघ बिहू (भोगली): यह जनवरी (मकर संक्रांति) में मनाया जाता है। यह फसल कटाई का उत्सव है, जिसमें लोग दावत (Feast) करते हैं।
प्र 2: सत्रिया नृत्य की शुरुआत किसने और कब की थी?
उत्तर: सत्रिया नृत्य की शुरुआत महान वैष्णव संत और समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव ने की थी। उन्होंने लगभग 500 वर्ष पूर्व (15वीं शताब्दी में) इस नृत्य शैली का विकास किया था। उनका उद्देश्य भक्ति आंदोलन को बढ़ाना और लोगों को ईश्वर (कृष्ण) की लीलाओं से जोड़ना था। उन्होंने नृत्य और नाटक (अंकिया नाट) को धर्म प्रचार का माध्यम बनाया।
प्र 3: 'पेपा' क्या है और यह किस नृत्य में प्रयोग होता है?
उत्तर: 'पेपा' असम का एक बहुत ही प्रसिद्ध और पारंपरिक वाद्य यंत्र (Musical Instrument) है। इसे भैंस के सींग (Buffalo Horn) से बनाया जाता है। इसकी आवाज़ बहुत तीखी और सुरीली होती है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से बिहू नृत्य में किया जाता है। पेपा की धुन सुनते ही असम के लोग थिरकने पर मजबूर हो जाते हैं।
प्र 4: लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य में क्या अंतर है?
उत्तर:
लोक नृत्य (Folk Dance): यह आम लोगों द्वारा खुशी के मौकों (शादी, त्यौहार) पर किया जाता है। इसमें कोई कड़े नियम नहीं होते। इसे कोई भी आसानी से सीख सकता है। उदाहरण: बिहू, भांगड़ा।
शास्त्रीय नृत्य (Classical Dance): यह प्राचीन शास्त्रों (नट्यशास्त्र) पर आधारित होता है। इसमें हाथ की मुद्राओं, चेहरे के भावों और पैरों की ताल के कड़े नियम होते हैं। इसे सीखने के लिए गुरु से लंबा प्रशिक्षण (Training) लेना पड़ता है। उदाहरण: सत्रिया, भरतनाट्यम।
#Competency Based Q&A
योग्यता आधारित प्रश्न (Competency Based Questions):
1. (सांस्कृतिक चेतना): नृत्य और संगीत हमारी संस्कृति को जीवित रखने में कैसे मदद करते हैं? (200-250 शब्द)
उत्तर: किसी भी देश या समाज की पहचान उसकी संस्कृति से होती है, और संस्कृति की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति उसकी कलाओं (नृत्य और संगीत) में होती है।
इतिहास का दर्पण: सत्रिया जैसे नृत्य हमें 500 साल पीछे ले जाते हैं और बताते हैं कि हमारे पूर्वज कैसे रहते थे, क्या सोचते थे और ईश्वर की भक्ति कैसे करते थे। यह एक जीवित इतिहास है।
मूल्यों का हस्तांतरण: बिहू नृत्य हमें प्रकृति प्रेम, मिलजुल कर रहने और खुशी बांटने का संस्कार देता है। जब युवा पीढ़ी इन नृत्यों को सीखती है, तो वे अनजाने में ही अपने संस्कारों को अपना लेते हैं।
भाषा से परे: नृत्य की कोई भाषा नहीं होती। एक तमिल व्यक्ति असमिया भाषा नहीं समझ सकता, लेकिन सत्रिया नृत्य के भावों को देखकर वह कृष्ण की कथा समझ सकता है। इस प्रकार, कला पूरे देश को जोड़ने का काम करती है। यदि हम अपने लोक नृत्यों को भूल जाएंगे, तो हम अपनी जड़ों से कट जाएंगे।
2. (कला एकीकरण): संत शंकरदेव ने धर्म प्रचार के लिए 'नृत्य' को ही माध्यम क्यों चुना? (200 शब्द)
उत्तर: 15वीं शताब्दी में अधिकांश लोग अशिक्षित थे। वे संस्कृत के भारी-भरकम ग्रंथ (वेद, पुराण) नहीं पढ़ सकते थे। संत शंकरदेव एक महान मनोवैज्ञानिक भी थे। वे जानते थे कि ""जो दिखता है, वह ज्यादा असर करता है।""
इसीलिए उन्होंने 'दृश्य-श्रव्य माध्यम' (Audio-Visual Medium) यानी नृत्य और नाटक (अंकिया नाट) को चुना। जब लोग मंच पर भगवान कृष्ण को राक्षसों से लड़ते हुए या माखन खाते हुए देखते थे, तो वे भाव-विभोर हो जाते थे। संगीत और लय लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती थी। इससे कठिन धार्मिक बातें भी अनपढ़ ग्रामीणों को आसानी से समझ आ जाती थीं। शंकरदेव ने कला को मनोरंजन से हटाकर 'ईश्वर प्राप्ति' का साधन बना दिया, जो उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है।
3. (विविधता में एकता): भारत के विभिन्न राज्यों के नृत्यों में विविधता होते हुए भी एकता कैसे है? (200-250 शब्द)
उत्तर: भारत को 'विविधता में एकता' वाला देश कहा जाता है और हमारे नृत्य इसका सबसे बड़ा प्रमाण हैं।
विविधता: असम का बिहू, पंजाब का भांगड़ा, गुजरात का गरबा और केरल का कथकली—सबकी वेशभूषा, भाषा, वाद्य यंत्र और शैली अलग-अलग है। बिहू में पेपा बजता है तो भांगड़ा में ढोल।
एकता: लेकिन इन सबकी 'आत्मा' एक है।
1. उद्देश्य: लगभग सभी भारतीय नृत्य या तो 'ईश्वर की भक्ति' के लिए हैं या 'कृषि/फसल' की खुशी मनाने के लिए।
2. भाव: सभी नृत्यों में खुशी, उल्लास और कृतज्ञता (Gratitude) का भाव समान है।
3. हस्त मुद्राएँ: शास्त्रीय नृत्यों (जैसे सत्रिया, भरतनाट्यम) में इस्तेमाल होने वाली कई हस्त मुद्राएँ (Hand Gestures) समान हैं क्योंकि वे एक ही स्रोत (नाट्यशास्त्र) से निकली हैं।
अतः, ऊपर से अलग दिखने पर भी भारतीय कलाएँ भीतर से एक ही सूत्र में पिरोई हुई हैं।
1. (सांस्कृतिक चेतना): नृत्य और संगीत हमारी संस्कृति को जीवित रखने में कैसे मदद करते हैं? (200-250 शब्द)
उत्तर: किसी भी देश या समाज की पहचान उसकी संस्कृति से होती है, और संस्कृति की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति उसकी कलाओं (नृत्य और संगीत) में होती है।
इतिहास का दर्पण: सत्रिया जैसे नृत्य हमें 500 साल पीछे ले जाते हैं और बताते हैं कि हमारे पूर्वज कैसे रहते थे, क्या सोचते थे और ईश्वर की भक्ति कैसे करते थे। यह एक जीवित इतिहास है।
मूल्यों का हस्तांतरण: बिहू नृत्य हमें प्रकृति प्रेम, मिलजुल कर रहने और खुशी बांटने का संस्कार देता है। जब युवा पीढ़ी इन नृत्यों को सीखती है, तो वे अनजाने में ही अपने संस्कारों को अपना लेते हैं।
भाषा से परे: नृत्य की कोई भाषा नहीं होती। एक तमिल व्यक्ति असमिया भाषा नहीं समझ सकता, लेकिन सत्रिया नृत्य के भावों को देखकर वह कृष्ण की कथा समझ सकता है। इस प्रकार, कला पूरे देश को जोड़ने का काम करती है। यदि हम अपने लोक नृत्यों को भूल जाएंगे, तो हम अपनी जड़ों से कट जाएंगे।
2. (कला एकीकरण): संत शंकरदेव ने धर्म प्रचार के लिए 'नृत्य' को ही माध्यम क्यों चुना? (200 शब्द)
उत्तर: 15वीं शताब्दी में अधिकांश लोग अशिक्षित थे। वे संस्कृत के भारी-भरकम ग्रंथ (वेद, पुराण) नहीं पढ़ सकते थे। संत शंकरदेव एक महान मनोवैज्ञानिक भी थे। वे जानते थे कि ""जो दिखता है, वह ज्यादा असर करता है।""
इसीलिए उन्होंने 'दृश्य-श्रव्य माध्यम' (Audio-Visual Medium) यानी नृत्य और नाटक (अंकिया नाट) को चुना। जब लोग मंच पर भगवान कृष्ण को राक्षसों से लड़ते हुए या माखन खाते हुए देखते थे, तो वे भाव-विभोर हो जाते थे। संगीत और लय लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती थी। इससे कठिन धार्मिक बातें भी अनपढ़ ग्रामीणों को आसानी से समझ आ जाती थीं। शंकरदेव ने कला को मनोरंजन से हटाकर 'ईश्वर प्राप्ति' का साधन बना दिया, जो उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है।
3. (विविधता में एकता): भारत के विभिन्न राज्यों के नृत्यों में विविधता होते हुए भी एकता कैसे है? (200-250 शब्द)
उत्तर: भारत को 'विविधता में एकता' वाला देश कहा जाता है और हमारे नृत्य इसका सबसे बड़ा प्रमाण हैं।
विविधता: असम का बिहू, पंजाब का भांगड़ा, गुजरात का गरबा और केरल का कथकली—सबकी वेशभूषा, भाषा, वाद्य यंत्र और शैली अलग-अलग है। बिहू में पेपा बजता है तो भांगड़ा में ढोल।
एकता: लेकिन इन सबकी 'आत्मा' एक है।
1. उद्देश्य: लगभग सभी भारतीय नृत्य या तो 'ईश्वर की भक्ति' के लिए हैं या 'कृषि/फसल' की खुशी मनाने के लिए।
2. भाव: सभी नृत्यों में खुशी, उल्लास और कृतज्ञता (Gratitude) का भाव समान है।
3. हस्त मुद्राएँ: शास्त्रीय नृत्यों (जैसे सत्रिया, भरतनाट्यम) में इस्तेमाल होने वाली कई हस्त मुद्राएँ (Hand Gestures) समान हैं क्योंकि वे एक ही स्रोत (नाट्यशास्त्र) से निकली हैं।
अतः, ऊपर से अलग दिखने पर भी भारतीय कलाएँ भीतर से एक ही सूत्र में पिरोई हुई हैं।
#SDG Goal
SDG 11: Sustainable Cities and Communities (संवहनीय शहर और समुदाय)
लक्ष्य 11.4: ""विश्व की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण और सुरक्षा के प्रयासों को बढ़ाना।""
विवरण: यह पाठ भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) यानी सत्रिया और बिहू नृत्य के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की बात करता है। अपनी संस्कृति को बचाए रखना सतत विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
लक्ष्य 11.4: ""विश्व की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण और सुरक्षा के प्रयासों को बढ़ाना।""
विवरण: यह पाठ भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) यानी सत्रिया और बिहू नृत्य के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की बात करता है। अपनी संस्कृति को बचाए रखना सतत विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
#Worksheet
Worksheet: Chapter 8 - Sattriya aur Bihu Nritya
Section A: एक शब्द में उत्तर दें (One Word Answer)
1. असम का प्रमुख लोक नृत्य कौन सा है?
2. सत्रिया नृत्य की शुरुआत किसने की?
3. बिहू साल में कितनी बार मनाया जाता है?
4. 'पेपा' किस जानवर के सींग से बनता है?
5. सत्रिया को किस वर्ष शास्त्रीय नृत्य का दर्जा मिला?
Section B: रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (Fill in the blanks)
6. बोहाग बिहू को __________ बिहू भी कहते हैं।
7. सत्रिया नृत्य का प्रदर्शन __________ (मठों) में किया जाता था।
8. काति बिहू __________ (माह) में मनाया जाता है।
9. बिहू नृत्य __________ वाद्य यंत्र की धुन पर किया जाता है।
10. शास्त्रीय नृत्य सीखने के लिए कड़े __________ का पालन करना पड़ता है।
Section C: सही या गलत (True or False)
11. बिहू एक शास्त्रीय नृत्य है। ( )
12. सत्रिया नृत्य 500 साल पुराना है। ( )
13. माघ बिहू फसल कटने की खुशी में मनाया जाता है। ( )
14. शंकरदेव ने केवल नाटक लिखे, नृत्य नहीं बनाया। ( )
15. पेपा की आवाज़ बहुत सुरीली होती है। ( )
Section D: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answers)
16. 'सत्र' किसे कहते हैं?
17. 'अंकिया नाट' क्या है?
18. बिहू के तीन प्रकारों के नाम लिखें।
19. 'भोकोट' कौन होते हैं?
20. भारत के किन्हीं दो शास्त्रीय नृत्यों के नाम लिखें।
Section E: लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answers)
21. लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य में दो मुख्य अंतर बताएँ।
22. बिहू त्यौहार खेती (Agriculture) से कैसे जुड़ा है?
23. श्रीमंत शंकरदेव ने सत्रिया नृत्य क्यों शुरू किया?
24. सत्रिया नृत्य को शास्त्रीय दर्जा मिलने से क्या लाभ हुआ?
25. काति बिहू को 'कंगली' (गरीब) बिहू क्यों कहा जाता है?
Section F: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answers)
26. सत्रिया और बिहू नृत्य का विस्तृत वर्णन करें।
27. ""त्यौहार और नृत्य हमें जोड़ते हैं"" - इस कथन की पुष्टि पाठ के आधार पर करें।
28. यदि आपको अपने स्कूल में 'असम की संस्कृति' पर भाषण देना हो, तो आप क्या बोलेंगे?
29. वाद्य यंत्रों का नृत्यों में क्या महत्व है? पेपा और ढोल के संदर्भ में बताएँ।
30. भारत की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए युवा पीढ़ी क्या कर सकती है?
Section A: एक शब्द में उत्तर दें (One Word Answer)
1. असम का प्रमुख लोक नृत्य कौन सा है?
2. सत्रिया नृत्य की शुरुआत किसने की?
3. बिहू साल में कितनी बार मनाया जाता है?
4. 'पेपा' किस जानवर के सींग से बनता है?
5. सत्रिया को किस वर्ष शास्त्रीय नृत्य का दर्जा मिला?
Section B: रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (Fill in the blanks)
6. बोहाग बिहू को __________ बिहू भी कहते हैं।
7. सत्रिया नृत्य का प्रदर्शन __________ (मठों) में किया जाता था।
8. काति बिहू __________ (माह) में मनाया जाता है।
9. बिहू नृत्य __________ वाद्य यंत्र की धुन पर किया जाता है।
10. शास्त्रीय नृत्य सीखने के लिए कड़े __________ का पालन करना पड़ता है।
Section C: सही या गलत (True or False)
11. बिहू एक शास्त्रीय नृत्य है। ( )
12. सत्रिया नृत्य 500 साल पुराना है। ( )
13. माघ बिहू फसल कटने की खुशी में मनाया जाता है। ( )
14. शंकरदेव ने केवल नाटक लिखे, नृत्य नहीं बनाया। ( )
15. पेपा की आवाज़ बहुत सुरीली होती है। ( )
Section D: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answers)
16. 'सत्र' किसे कहते हैं?
17. 'अंकिया नाट' क्या है?
18. बिहू के तीन प्रकारों के नाम लिखें।
19. 'भोकोट' कौन होते हैं?
20. भारत के किन्हीं दो शास्त्रीय नृत्यों के नाम लिखें।
Section E: लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answers)
21. लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य में दो मुख्य अंतर बताएँ।
22. बिहू त्यौहार खेती (Agriculture) से कैसे जुड़ा है?
23. श्रीमंत शंकरदेव ने सत्रिया नृत्य क्यों शुरू किया?
24. सत्रिया नृत्य को शास्त्रीय दर्जा मिलने से क्या लाभ हुआ?
25. काति बिहू को 'कंगली' (गरीब) बिहू क्यों कहा जाता है?
Section F: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answers)
26. सत्रिया और बिहू नृत्य का विस्तृत वर्णन करें।
27. ""त्यौहार और नृत्य हमें जोड़ते हैं"" - इस कथन की पुष्टि पाठ के आधार पर करें।
28. यदि आपको अपने स्कूल में 'असम की संस्कृति' पर भाषण देना हो, तो आप क्या बोलेंगे?
29. वाद्य यंत्रों का नृत्यों में क्या महत्व है? पेपा और ढोल के संदर्भ में बताएँ।
30. भारत की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए युवा पीढ़ी क्या कर सकती है?