PADHNA LIKHNA

Reedh Ki Haddi-रीढ़ की हड्डी

#LEKHAK PARICHAY

जगदीशचंद्र माथुर – संक्षिप्त परिचय

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जगदीशचंद्र माथुर हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध नाटककार, एकांकीकार तथा प्रशासक थे। उनका जन्म सन् 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की तथा इंडियन सिविल सर्विस (ICS) में भी चयनित हुए।

उन्होंने बिहार राज्य के शिक्षा सचिव, आकाशवाणी के महानिदेशक तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य किया। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे साहित्य-सृजन में भी निरंतर सक्रिय रहे।

प्रयाग में अध्ययन के दौरान ही उन्होंने लेखन कार्य आरंभ कर दिया था। उनकी रचनाएँ उस समय की प्रसिद्ध पत्रिकाओं 'चाँद' और 'रूपाभ' में प्रकाशित होने लगी थीं। हिंदी नाटक और रंगमंच के विकास में उनके नाटकों एवं एकांकियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक विषयों के साथ-साथ सामाजिक समस्याओं पर आधारित नाटक भी लिखे।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं— ‘भोर का तारा’, ‘कोणार्क’, ‘ओ मेरे सपने’, ‘शारदीया’, ‘पहला राजा’, ‘दस तस्वीरें’ तथा ‘जिन्होंने जीना जाना’। उनकी समस्त रचनाएँ ‘जगदीशचंद्र माथुर रचनावली’ (चार खंडों) में संकलित हैं। ‘कोणार्क’ उनका सर्वाधिक प्रसिद्ध और मंचित नाटक माना जाता है।

सन् 1978 में उनका निधन हो गया, किंतु हिंदी नाटक और रंगमंच के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी स्मरणीय है।​

जगदीशचंद्र माथुर हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार थे, जिन्होंने हिंदी रंगमंच को नई दिशा प्रदान की और ‘कोणार्क’ जैसे कालजयी नाटक की रचना की।

रीढ़ की हड्डी' एकांकी – परिचय

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'रीढ़ की हड्डी' जगदीशचंद्र माथुर द्वारा रचित एक प्रसिद्ध सामाजिक एकांकी है। इसकी रचना सन् 1939 में की गई थी। यह एकांकी भारतीय समाज में प्रचलित विवाह संबंधी रूढ़ियों, दहेज प्रथा तथा स्त्रियों के प्रति संकीर्ण सोच पर तीखा व्यंग्य करती है।

उस समय समाज में लड़कियों को शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में पुरुषों के समान अवसर नहीं दिए जाते थे। विवाह के लिए कम पढ़ी-लिखी तथा आज्ञाकारी लड़कियों को अधिक उपयुक्त माना जाता था। इस एकांकी में ऐसी ही सामाजिक मानसिकता को उजागर किया गया है। साथ ही विवाह के नाम पर होने वाले लेन-देन और दहेज जैसी कुरीतियों की भी आलोचना की गई है।

एकांकी की मुख्य पात्र 'उमा' एक शिक्षित, आत्मसम्मानी और साहसी युवती है। वह समाज में महिलाओं की जागरूकता और सशक्तता का प्रतीक बनकर उभरती है। उमा अपने विचारों और आत्मविश्वास के माध्यम से यह सिद्ध करती है कि स्त्रियाँ किसी भी दृष्टि से पुरुषों से कम नहीं हैं।

इस प्रकार 'रीढ़ की हड्डी' केवल एक सामाजिक एकांकी नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, शिक्षा, समानता और आत्मनिर्भरता का सशक्त संदेश भी देती है।

मुख्य संदेश:

स्त्रियों को शिक्षा, सम्मान और समान अवसर मिलने चाहिए तथा दहेज और विवाह संबंधी रूढ़िवादी विचारों का विरोध किया जाना चाहिए।
'रीढ़ की हड्डी' – पात्र परिचय
पात्रपरिचय
उमाएक शिक्षित, आत्मसम्मानी और साहसी युवती। वह नाटक की मुख्य पात्र है तथा नारी-सशक्तिकरण और आत्मविश्वास का प्रतिनिधित्व करती है।
रामस्वरूप (बाबू)उमा के पिता। वे अपनी पुत्री के विवाह को लेकर चिंतित रहते हैं और सामाजिक परंपराओं का पालन करने का प्रयास करते हैं।
प्रेमाउमा की माँ। वह एक स्नेहमयी गृहिणी हैं और बेटी के विवाह की तैयारियों में लगी रहती हैं।
शंकरविवाह के लिए आया हुआ युवक। वह पढ़ा-लिखा है, परंतु अपने पिता के प्रभाव में रहता है और स्वयं निर्णय लेने में सक्षम नहीं दिखाई देता।
गोपालप्रसादशंकर के पिता। वे दहेज-प्रथा और रूढ़िवादी विचारों के समर्थक हैं। लड़की को परखने और उसकी शिक्षा को कम महत्त्व देने वाली मानसिकता का प्रतिनिधित्व करते हैं।
रतन (कुछ संस्करणों में ‘स्तन’ के स्थान पर ‘रतन’)रामस्वरूप का घरेलू सहायक। वह घर के कार्यों में सहायता करता है और प्रसंगानुसार मंच पर उपस्थित रहता है।

पात्रों का वर्गीकरण

  • नारी पात्र – उमा, प्रेमा
  • पुरुष पात्र – रामस्वरूप, शंकर, गोपालप्रसाद, रतन

मुख्य पात्र

उमा – यह एकांकी की केंद्रीय पात्र है। उसके आत्मविश्वासपूर्ण व्यक्तित्व के कारण ही एकांकी का मुख्य संदेश प्रभावशाली ढंग से सामने आता है।



#Textbook Q & A

"मेरे उत्तर मेरे तर्क"

1. एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' का शीर्षक किसका प्रतीक है?

सही उत्तर : (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का

तर्क : 'रीढ़ की हड्डी' केवल शरीर का अंग नहीं है, बल्कि साहस, आत्मविश्वास, स्वाभिमान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है। एकांकी में उमा अन्याय और रूढ़िवादी सोच का डटकर विरोध करती है। वह लड़के वालों के सामने अपनी बात स्पष्ट रूप से रखती है और अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करती। दूसरी ओर शंकर अपने पिता की गलत सोच का विरोध नहीं कर पाता। इसलिए शीर्षक आत्मसम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है।

2. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?

सही उत्तर : (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर

तर्क : इस एकांकी में लेखक ने समाज की रूढ़िवादी सोच, स्त्री-शिक्षा के विरोध, विवाह में लड़की को वस्तु की तरह परखने की प्रथा तथा पुरुषवादी मानसिकता पर तीखा व्यंग्य किया है। गोपालप्रसाद जैसे पात्र समाज की इसी संकीर्ण सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए यह व्यंग्य किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि समाज की अनुचित मान्यताओं पर है।

3. "घर जाकर जरा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं।" यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?

सही उत्तर : (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता

तर्क : शंकर पढ़ा-लिखा युवक है, लेकिन वह अपने पिता की गलत बातों का विरोध नहीं करता। वह केवल दर्शक बनकर बैठा रहता है। उसमें सत्य के पक्ष में खड़े होने का साहस नहीं है। उमा इसी कारण व्यंग्यपूर्वक उसके चरित्र की कमजोरी की ओर संकेत करती है। यहाँ रीढ़ की हड्डी का अर्थ नैतिक साहस और दृढ़ व्यक्तित्व से है।

4. "जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।" उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ क्या है?

सही उत्तर : (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना

तर्क : उमा के लिए शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं है। शिक्षा ने उसे आत्मविश्वासी, जागरूक और स्वतंत्र विचारों वाला बनाया है। वह अपने अधिकारों को पहचानती है और अन्याय का विरोध करती है। इसलिए उसकी दृष्टि में शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य आत्मबल, विवेक और स्वतंत्र चिंतन विकसित करना है।

5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?

सही उत्तर : (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।

तर्क : गोपालप्रसाद स्वयं पढ़े-लिखे हैं, लेकिन पढ़ी-लिखी बहू नहीं चाहते। दूसरी ओर रामस्वरूप अपनी बेटी की शिक्षा और प्रतिभा को छिपाने का प्रयास करते हैं ताकि विवाह तय हो जाए। दोनों पात्र समाज की रूढ़ियों और दिखावे से प्रभावित हैं। दोनों अपने वास्तविक विचारों के बजाय सामाजिक मान्यताओं के अनुसार व्यवहार करते हैं।

6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?

सही उत्तर : (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण

तर्क : एकांकी के संवाद बोलचाल की सरल भाषा में हैं, जिससे वे अत्यंत स्वाभाविक लगते हैं। साथ ही लेखक ने व्यंग्य के माध्यम से समाज की कुरीतियों पर प्रहार किया है। उमा, गोपालप्रसाद और रामस्वरूप के संवादों में यह व्यंग्य स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इसलिए संवाद शैली स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण है।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण निष्कर्ष

प्रश्नसही उत्तर
1(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
2(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
3(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
4(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
5(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं
6(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण

मुख्य संदेश: "रीढ़ की हड्डी" व्यक्ति के आत्मसम्मान, नैतिक साहस और स्वतंत्र व्यक्तित्व का प्रतीक है।

'मेरी समझ मेरे विचार'

1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्विरोध के उदाहरण एकांकी से खोजकर लिखिए।

उत्तर : बाबू रामस्वरूप स्वयं को आधुनिक और प्रगतिशील दिखाने का प्रयास करते हैं, परंतु उनके विचार पूरी तरह आधुनिक नहीं हैं। वे अपनी बेटी उमा को बी.ए. तक पढ़ाते हैं, संगीत और चित्रकला भी सिखाते हैं, जो उनकी आधुनिक सोच का परिचायक है। दूसरी ओर, जब विवाह की बात आती है तो वे लड़के वालों की संकीर्ण मानसिकता के आगे झुक जाते हैं और उमा की शिक्षा तथा योग्यताओं को छिपाने का प्रयास करते हैं।

वे घर में हारमोनियम, सितार और चित्रकला का प्रदर्शन करके अपनी प्रतिष्ठा दिखाना चाहते हैं, किंतु यह भी चाहते हैं कि लड़के वालों को लड़की अधिक पढ़ी-लिखी न लगे। वे जानते हैं कि गोपालप्रसाद की सोच स्त्री-शिक्षा के विरुद्ध है, फिर भी विवाह के लिए उनकी बातों को सहन करते हैं। इस प्रकार उनका व्यवहार आधुनिकता का दिखावा करता है, जबकि भीतर से वे सामाजिक दबाव और रूढ़ियों के शिकार बने रहते हैं।

2. 'रीढ़ की हड्डी' का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है। उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।

उत्तर : एकांकी में 'रीढ़ की हड्डी' शब्द दो पात्रों के लिए अलग-अलग अर्थों में प्रयुक्त हुआ है।

(क) उमा के संदर्भ में

उमा के लिए 'रीढ़ की हड्डी' आत्मसम्मान, साहस, आत्मविश्वास और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है। वह लड़के वालों द्वारा किए गए अपमानजनक व्यवहार का विरोध करती है और निर्भीक होकर अपने विचार व्यक्त करती है। वह किसी वस्तु की तरह परखे जाने को स्वीकार नहीं करती। उसके व्यक्तित्व में आत्मगौरव और स्वतंत्र चिंतन की शक्ति दिखाई देती है।

(ख) शंकर के संदर्भ में

शंकर के लिए 'रीढ़ की हड्डी' नैतिक साहस और स्वतंत्र व्यक्तित्व का प्रतीक है। वह पढ़ा-लिखा युवक होने के बावजूद अपने पिता की गलत बातों का विरोध नहीं करता। उमा व्यंग्य करते हुए कहती है कि जाकर पता लगाइए कि आपके बेटे की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं। यहाँ रीढ़ की हड्डी का अर्थ है — अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस, जो शंकर में नहीं दिखाई देता।

इस प्रकार उमा मजबूत रीढ़ का प्रतीक है, जबकि शंकर रीढ़हीन व्यक्तित्व का।


3. "मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।" प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?

उत्तर : प्रेमा का यह कथन उस समय समाज में स्त्री-शिक्षा के प्रति व्याप्त संकीर्ण दृष्टिकोण को दर्शाता है। उस काल में अधिकांश लोग मानते थे कि लड़कियों का मुख्य कार्य घर-गृहस्थी संभालना है, इसलिए उन्हें अधिक शिक्षा की आवश्यकता नहीं है।

प्रेमा स्वयं शिक्षित नहीं है, इसलिए वह पढ़ाई-लिखाई को अनावश्यक समझती है। उसे लगता है कि घरेलू कार्य सीख लेना ही लड़कियों के लिए पर्याप्त है। यह विचार उस समय की सामाजिक व्यवस्था को दर्शाता है, जहाँ स्त्रियों को पुरुषों के समान शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिलता था।

लेखक ने प्रेमा के माध्यम से उस मानसिकता पर व्यंग्य किया है जो स्त्रियों की क्षमता को सीमित कर देती है। उमा का शिक्षित और आत्मविश्वासी व्यक्तित्व इस सोच का सशक्त विरोध प्रस्तुत करता है।

4. लेखक ने 'रीढ़ की हड्डी' शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आपको इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना हो, तो वह क्या होगा और क्यों?

उत्तर : लेखक ने 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक इसलिए चुना है क्योंकि यह एकांकी के मूल संदेश को व्यक्त करता है। रीढ़ की हड्डी शरीर को सीधा खड़ा रखती है। उसी प्रकार आत्मसम्मान, साहस और नैतिक दृढ़ता व्यक्ति के व्यक्तित्व की रीढ़ होते हैं।

एकांकी में उमा इन गुणों का परिचय देती है। वह अन्याय और रूढ़िवादिता के सामने झुकती नहीं है। इसके विपरीत शंकर पढ़ा-लिखा होने के बावजूद अपने पिता की गलत सोच का विरोध नहीं कर पाता। इस प्रकार शीर्षक केवल शारीरिक अंग का नहीं, बल्कि नैतिक साहस और व्यक्तित्व की दृढ़ता का प्रतीक बन जाता है।

वैकल्पिक शीर्षक :

"आत्मसम्मान की जीत"

यह शीर्षक उपयुक्त होगा क्योंकि पूरी एकांकी में उमा के आत्मसम्मान, स्वाभिमान और साहस की विजय दिखाई गई है। अंत में वही पात्र सबसे अधिक प्रभावशाली सिद्ध होती है और समाज की संकीर्ण सोच को चुनौती देती है।

अन्य उपयुक्त शीर्षक हो सकते हैं—

  • "नारी का स्वाभिमान"
  • "रीढ़हीन समाज"
  • "उमा का प्रतिरोध"
  • "साहस की पहचान"

परीक्षा हेतु निष्कर्ष

'रीढ़ की हड्डी' का केंद्रीय संदेश है कि शिक्षा तभी सार्थक है जब उसके साथ आत्मसम्मान, स्वतंत्र विचार और अन्याय का विरोध करने का साहस भी हो। उमा इस साहस की प्रतीक है, जबकि शंकर और उसके पिता समाज की रूढ़िवादी सोच के प्रतिनिधि हैं।


विचारों से संवाद

1. "भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।"

एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि व्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?

उत्तर : एकांकी में अनेक स्थानों पर लड़कों और लड़कियों के प्रति भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण दिखाई देता है। गोपालप्रसाद कहते हैं कि उन्हें अधिक पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए। उनका मानना है कि लड़कियों का काम केवल घर-गृहस्थी संभालना है। वे यह भी कहते हैं कि पुरुषों और स्त्रियों की शिक्षा एक समान नहीं हो सकती। दूसरी ओर शंकर की उच्च शिक्षा और पढ़ाई की प्रशंसा की जाती है।

इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि उस समय समाज में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग मानदंड बनाए गए थे। लड़कों की शिक्षा को प्रगति और सफलता का माध्यम माना जाता था, जबकि लड़कियों की शिक्षा को अनावश्यक समझा जाता था।

मेरे विचार से यह भेदभाव अनुचित है। शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। लड़का और लड़की दोनों समान रूप से प्रतिभाशाली हो सकते हैं। आधुनिक समाज में स्त्री-पुरुष समानता को स्वीकार किया गया है और दोनों को समान अवसर मिलने चाहिए। शिक्षा के आधार पर किसी भी प्रकार का लैंगिक भेदभाव समाज की प्रगति में बाधक है।

2. "मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का ख्याल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह आँखें छिपाकर भागे थे।"

उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उसके व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी?

Answer : उमा एक शिक्षित, आत्मसम्मानी, निर्भीक और प्रगतिशील युवती है। वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और अन्याय का विरोध करने का साहस रखती है। लड़के वालों द्वारा अपमानजनक व्यवहार किए जाने पर वह चुप नहीं रहती, बल्कि खुलकर अपनी बात कहती है। उसके व्यक्तित्व में आत्मविश्वास, स्पष्टवादिता और स्वाभिमान की भावना दिखाई देती है।

उमा की ये विशेषताएँ उसकी शिक्षा, संस्कार और पारिवारिक वातावरण के कारण विकसित हुई हैं। उसने उच्च शिक्षा प्राप्त की है, जिससे उसमें स्वतंत्र चिंतन की क्षमता आई है। संगीत, चित्रकला और साहित्य जैसे विषयों ने उसके व्यक्तित्व को और समृद्ध बनाया है। यद्यपि उसके माता-पिता सामाजिक दबावों से प्रभावित हैं, फिर भी उन्होंने उसे शिक्षित बनाया, जिससे उसमें आत्मबल और आत्मविश्वास का विकास हुआ।

उमा आधुनिक भारतीय नारी का प्रतिनिधित्व करती है, जो अपने सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना जानती है।

सृजन

1. एकांकी के अंत में रतन कहता है— "बाबूजी, मक्खन!" और पर्दा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद पर एकांकी का अंत क्यों किया होगा?

उत्तर : लेखक ने इस संवाद पर एकांकी का अंत हास्य, व्यंग्य और प्रतीकात्मकता के कारण किया है। पूरी एकांकी में विवाह की बातचीत, दिखावा, सामाजिक रूढ़ियाँ और झूठी प्रतिष्ठा का चित्रण किया गया है। अंत में जब रतन "मक्खन" की बात करता है, तो यह केवल खाने वाले मक्खन की ओर संकेत नहीं करता, बल्कि उन लोगों पर भी व्यंग्य करता है जो चापलूसी और दिखावे के सहारे रिश्ते बनाने की कोशिश करते हैं।

यह संवाद पाठकों के मन में मुस्कान भी उत्पन्न करता है और समाज की विसंगतियों पर सोचने के लिए भी प्रेरित करता है। लेखक ने गंभीर सामाजिक समस्या को व्यंग्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करते हुए नाटक का प्रभावशाली समापन किया है।

2. एकांकी में यदि पर्दा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाकर लिखिए।

उत्तर : यदि पर्दा दोबारा उठे तो संभवतः गोपालप्रसाद और शंकर अपने व्यवहार पर विचार करते दिखाई देंगे। उमा की निर्भीकता और स्पष्टवादिता से वे प्रभावित होंगे। गोपालप्रसाद को अपनी संकीर्ण सोच और स्त्री-शिक्षा के प्रति पूर्वाग्रह का एहसास हो सकता है।

रामस्वरूप भी समझेंगे कि बेटी की योग्यताओं को छिपाने के बजाय उन पर गर्व करना चाहिए। उमा आत्मविश्वास के साथ अपने विचारों पर अडिग रहेगी।

संभव है कि शंकर पहली बार अपने पिता की गलत सोच का विरोध करे और उमा के आत्मसम्मान की सराहना करे। इस प्रकार अगला दृश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन और स्त्री-सम्मान की स्थापना का संदेश दे सकता है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

'रीढ़ की हड्डी' केवल एक विवाह-प्रसंग पर आधारित एकांकी नहीं है, बल्कि यह स्त्री-शिक्षा, आत्मसम्मान, सामाजिक रूढ़ियों और लैंगिक समानता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहरा व्यंग्य करती है। उमा का चरित्र इस एकांकी की वास्तविक 'रीढ़' है, जो साहस, स्वाभिमान और स्वतंत्र विचारों का प्रतीक बनकर उभरता है।

भाषा में मुहावरे

1. "भीगी बिल्ली की तरह"

अर्थ: डरा-सहमा या दब्बू बनकर रहना।

नया वाक्य: गलती करने के बाद मोहित शिक्षक के सामने भीगी बिल्ली की तरह खड़ा था।

2. "मुँह फुलाना"

अर्थ: नाराज़ होकर चुप बैठ जाना।

नया वाक्य: खिलौना न मिलने पर छोटा बच्चा मुँह फुलाकर बैठ गया।

3. "किस मर्ज़ की दवा होना"

अर्थ: किसी काम का न होना।

नया वाक्य: यदि समय पर सहायता न कर सको, तो ऐसी मित्रता किस मर्ज़ की दवा है?

4. "सिर चढ़ाना"

अर्थ: आवश्यकता से अधिक लाड़-प्यार करना।

नया वाक्य: बच्चों को अधिक सिर चढ़ाने से वे जिद्दी हो जाते हैं।

5. "सब-कुछ उगल देना"

अर्थ: पूरी बात बता देना, रहस्य खोल देना।

नया वाक्य: पुलिस की पूछताछ में चोर ने सब-कुछ उगल दिया

6. "काँटों में घसीटना"

अर्थ: कठिनाई या परेशानी में डालना।

नया वाक्य: बिना कारण किसी को विवाद में घसीटना, उसे काँटों में घसीटने के समान है।

7. "इज्जत उतारना"

अर्थ: अपमान करना।

नया वाक्य: सभी के सामने किसी की इज्जत उतारना अच्छी बात नहीं है।

8. "मुँह छिपाकर भागना"

अर्थ: शर्मिंदा होकर छिप जाना या भाग जाना।

नया वाक्य: नकल करते पकड़े जाने पर छात्र मुँह छिपाकर भाग गया

संदर्भ में शब्द

"बाप सेर है तो लड़का सवा सेर"

अर्थ: यदि पिता किसी गुण में श्रेष्ठ है तो पुत्र उससे भी बढ़कर निकल सकता है।

सकारात्मक अर्थ में वाक्य:

  1. राहुल के पिता प्रसिद्ध खिलाड़ी हैं और राहुल ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता जीत ली; सच ही है, बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।
  2. पिता एक अच्छे शिक्षक थे और पुत्र ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में नाम कमाया; बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।
  3. दादा जी महान कलाकार थे और उनका पोता उनसे भी अधिक प्रसिद्ध चित्रकार बन गया; बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।
  4. पिता सफल वैज्ञानिक थे, लेकिन बेटी ने नई खोज करके देश का नाम रोशन कर दिया; बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।

  1. खेल, शिक्षा और संस्कार—हर क्षेत्र में बेटे ने अपने पिता की उपलब्धियों को पीछे छोड़ दिया; सचमुच बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।

मेरे शब्द (उदाहरण)

यदि आपको पाँच नए शब्द चुनने हों, तो आप ये लिख सकते हैं—

शब्दअनुमानित अर्थशब्दकोशीय अर्थ
दकियानूसीपुराने विचारों वालारूढ़िवादी विचारों वाला
तकल्लुफऔपचारिकतादिखावटी आदर-सत्कार
निहायतबहुतअत्यंत
मुखातिबसामनेआमने-सामने बात करने वाला
लताफ़तकोमलतामधुरता और नजाकत

#Worksheet

CBSE Competency-Based Worksheet (With Answers)

पाठ – रीढ़ की हड्डी (जगदीशचंद्र माथुर)

कक्षा – 9

MCQ 

1. रामस्वरूप अपनी बेटी उमा के लिए किस प्रकार का वर चाहते थे?

(A) धनवान और अशिक्षित
(B) पढ़ा-लिखा और समझदार
(C) केवल सुंदर
(D) सरकारी अधिकारी

उत्तर: (B) पढ़ा-लिखा और समझदार

2. गोपालप्रसाद लड़कियों की शिक्षा के विषय में क्या सोच रखते थे?

(A) शिक्षा आवश्यक है
(B) लड़कियों को उच्च शिक्षा मिलनी चाहिए
(C) अधिक पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए
(D) शिक्षा और विवाह दोनों जरूरी हैं

उत्तर: (C) अधिक पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए

3. 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक मुख्य रूप से किसका प्रतीक है?

(A) शारीरिक शक्ति
(B) आत्मसम्मान और साहस
(C) धन-संपत्ति
(D) शिक्षा

उत्तर: (B) आत्मसम्मान और साहस

4. उमा का चरित्र किस विशेषता को सबसे अधिक दर्शाता है?

(A) संकोच
(B) आत्मविश्वास
(C) आलस्य
(D) स्वार्थ

उत्तर: (B) आत्मविश्वास

5. एकांकी का मुख्य उद्देश्य क्या है?

(A) विवाह समारोह का वर्णन
(B) सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग्य
(C) संगीत की शिक्षा
(D) पारिवारिक मनोरंजन

उत्तर: (B) सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग्य

अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

1. गोपालप्रसाद लड़कियों की शिक्षा के विरोधी क्यों दिखाई देते हैं?

उत्तर: गोपालप्रसाद का मानना था कि अधिक पढ़ी-लिखी लड़कियाँ गृहस्थी के कार्यों में रुचि नहीं लेतीं। वे स्त्री-शिक्षा को अनावश्यक समझते थे। उनकी सोच रूढ़िवादी और पुरुष-प्रधान समाज का प्रतिनिधित्व करती है।

2. रामस्वरूप अपनी बेटी की योग्यताओं को छिपाने का प्रयास क्यों करते हैं?

उत्तर:  रामस्वरूप जानते थे कि लड़के वाले अधिक पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहते। विवाह की संभावना बनी रहे, इसलिए वे उमा की शिक्षा और प्रतिभा को कम करके दिखाने का प्रयास करते हैं। यह उस समय की सामाजिक विवशता को दर्शाता है।

3. उमा का आत्मसम्मान किन घटनाओं से प्रकट होता है?

उत्तर: उमा लड़के वालों के अपमानजनक प्रश्नों का साहसपूर्वक उत्तर देती है। वह स्वयं को वस्तु की तरह परखे जाने का विरोध करती है। उसके स्पष्ट और निर्भीक व्यवहार से उसका आत्मसम्मान प्रकट होता है।

4. शंकर का चरित्र उस समय के युवाओं का किस प्रकार प्रतिनिधित्व करता है?

उत्तर: शंकर पढ़ा-लिखा युवक है, लेकिन वह अपने पिता के विचारों का विरोध नहीं करता। उसकी चुप्पी बताती है कि कई शिक्षित युवक भी सामाजिक कुरीतियों के सामने साहस नहीं दिखाते थे। वह कमजोर व्यक्तित्व का प्रतीक है।

5. एकांकी में विवाह-प्रथा की कौन-सी कमियाँ उजागर हुई हैं?

उत्तर: एकांकी में लड़की को वस्तु की तरह परखने की प्रथा दिखाई गई है। स्त्री-शिक्षा का विरोध, दहेज की मानसिकता और स्त्रियों के प्रति असमान व्यवहार जैसी कमियों को उजागर किया गया है। लेखक ने इन पर तीखा व्यंग्य किया है।

लघु उत्तरीय प्रश्न 

1. 'रीढ़ की हड्डी' में स्त्री-शिक्षा से संबंधित सामाजिक मानसिकता का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर: एकांकी में समाज की संकीर्ण मानसिकता दिखाई गई है, जहाँ लड़कियों की अधिक शिक्षा को विवाह में बाधा माना जाता था। गोपालप्रसाद जैसे लोग शिक्षित बहू नहीं चाहते थे। वे मानते थे कि स्त्रियों का कार्य केवल घर संभालना है। लेखक ने इस सोच का व्यंग्यपूर्ण चित्रण किया है। उमा के माध्यम से स्त्री-शिक्षा के महत्व को स्थापित किया गया है।

2. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप के व्यवहार में दिखाई देने वाले विरोधाभासों को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: गोपालप्रसाद स्वयं शिक्षित हैं, पर शिक्षित बहू नहीं चाहते। दूसरी ओर रामस्वरूप बेटी को शिक्षित बनाते हैं, लेकिन विवाह के लिए उसकी योग्यता छिपाते हैं। दोनों के व्यवहार में सामाजिक दिखावा और दोहरा मापदंड दिखाई देता है। यह उस समय की सामाजिक विडंबना को दर्शाता है।

3. उमा को आधुनिक भारतीय नारी का प्रतिनिधि पात्र क्यों कहा जा सकता है?

उत्तर: उमा शिक्षित, आत्मनिर्भर और आत्मसम्मानी युवती है। वह अन्याय और अपमान का विरोध करने का साहस रखती है। वह अपनी बात स्पष्ट रूप से कहती है। उसमें आत्मविश्वास और विवेक दोनों हैं। इसलिए वह आधुनिक भारतीय नारी का प्रतिनिधित्व करती है।

4. एकांकी के शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: रीढ़ की हड्डी व्यक्ति की दृढ़ता और साहस का प्रतीक है। एकांकी में उमा आत्मसम्मान और निर्भीकता की मिसाल प्रस्तुत करती है। वह सामाजिक कुरीतियों के सामने झुकती नहीं है। इसलिए शीर्षक उसके मजबूत व्यक्तित्व को दर्शाता है और पूरी तरह सार्थक है।

5. इस एकांकी में व्यंग्य का प्रयोग सामाजिक सुधार में किस प्रकार सहायक सिद्ध हुआ है?

उत्तर: लेखक ने व्यंग्य के माध्यम से समाज की कुरीतियों को उजागर किया है। गोपालप्रसाद जैसे पात्रों के माध्यम से स्त्री-विरोधी सोच पर कटाक्ष किया गया है। व्यंग्य पाठकों को सोचने पर मजबूर करता है। इससे सामाजिक सुधार का संदेश प्रभावी ढंग से पहुँचता है।

Competency-Based Case Study Questions

गद्यांश:

"हम लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई को एक नहीं मानते।"

1. उपर्युक्त कथन किस मानसिकता को दर्शाता है?

(A) प्रगतिशील सोच
(B) लैंगिक असमानता
(C) वैज्ञानिक दृष्टिकोण
(D) सामाजिक समानता

उत्तर: (B) लैंगिक असमानता

2. यदि आप उमा के स्थान पर होते, तो इस सोच का विरोध किस प्रकार करते?

उत्तर: मैं शिक्षा को सभी का समान अधिकार बताता। तर्क देता कि लड़कियाँ भी समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। शिक्षा से उनका व्यक्तित्व विकसित होता है और वे आत्मनिर्भर बनती हैं।

3. यह विचार वर्तमान भारतीय समाज में किस सीमा तक प्रासंगिक है?

उत्तर: आज समाज में काफी बदलाव आया है, परंतु कुछ क्षेत्रों में अभी भी ऐसी सोच मौजूद है। कई परिवार लड़कियों की शिक्षा को कम महत्व देते हैं। इसलिए यह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

4. इस कथन से गोपालप्रसाद के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषता उजागर होती है?

उत्तर: यह कथन उनकी संकीर्ण, रूढ़िवादी और पुरुषवादी सोच को दर्शाता है। वे स्त्री-पुरुष को समान अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं।

5. लेखक इस प्रकार की सोच के बारे में क्या संदेश देना चाहते हैं?

उत्तर: लेखक ऐसी सोच का विरोध करते हैं। वे स्त्री-पुरुष समानता और स्त्री-शिक्षा का समर्थन करते हैं। उनका संदेश है कि शिक्षा और सम्मान का अधिकार सभी को समान रूप से मिलना चाहिए।

HOTS (Higher Order Thinking Skills)

1. यदि उमा चुप रहती, तो क्या एकांकी का संदेश प्रभावी बन पाता?

उत्तर: नहीं, यदि उमा चुप रहती तो स्त्री-सशक्तिकरण का संदेश कमजोर पड़ जाता। उसका विरोध ही एकांकी का सबसे प्रभावशाली भाग है। उसी के माध्यम से आत्मसम्मान और समानता का संदेश मिलता है।

2. क्या शिक्षा केवल नौकरी प्राप्त करने का साधन है?

उत्तर: नहीं, शिक्षा केवल नौकरी प्राप्त करने का साधन नहीं है। यह व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करती है। शिक्षा सही और गलत में अंतर करना सिखाती है तथा आत्मविश्वास बढ़ाती है।

3. आज भी विवाह के समय लड़कियों का मूल्यांकन अन्य आधारों पर किया जाता है। इस कथन पर प्रतिक्रिया दीजिए।

उत्तर: यह सोच अनुचित है। विवाह में व्यक्ति के गुण, संस्कार और व्यक्तित्व को महत्व दिया जाना चाहिए। केवल रूप, धन या बाहरी बातों के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए।

4. आत्मसम्मान और पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जा सकता है?

उत्तर: व्यक्ति को अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करना चाहिए। साथ ही परिवार से संवाद बनाकर चलना चाहिए। सम्मानपूर्वक अपनी बात रखना ही संतुलन का सर्वोत्तम तरीका है।

5. यदि गोपालप्रसाद की सोच बदल जाती, तो एकांकी का अंत किस प्रकार भिन्न हो सकता था?

उत्तर: यदि उनकी सोच प्रगतिशील होती, तो वे उमा की शिक्षा और प्रतिभा का सम्मान करते। विवाह समानता और सम्मान के आधार पर तय होता। इससे एक सुखद और सकारात्मक अंत देखने को मिलता।

मूल्य-आधारित प्रश्न

"व्यक्ति की वास्तविक रीढ़ उसकी शिक्षा नहीं, बल्कि उसका आत्मसम्मान और सही बात के लिए खड़े होने का साहस है।"

उत्तर: मैं इस कथन से सहमत हूँ। शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान देती है, लेकिन आत्मसम्मान उसे सही निर्णय लेने की शक्ति देता है। उमा इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। उसने अन्याय के सामने झुकने के बजाय साहसपूर्वक अपनी बात रखी। जीवन में सफलता के लिए ज्ञान के साथ आत्मसम्मान और साहस भी आवश्यक हैं। यही व्यक्ति की वास्तविक रीढ़ है।

#Kathin Shabdarth- Muhaware

कठिन शब्दार्थ :

शब्दअर्थ
तख्तलकड़ी का चौड़ा पलंग
मालूमज्ञात, पता
अक्लबुद्धि
कसरतव्यायाम
लोटापानी रखने का पात्र
चादरबिछाने या ओढ़ने का कपड़ा
मेज़पोशमेज़ पर बिछाया जाने वाला कपड़ा
झाड़नसफाई करने का उपकरण
गुलदस्ताफूलों का गुच्छा
जाहिरप्रकट
व्यस्तकाम में लगे हुए
कोठरीछोटा कमरा
हारमोनियमएक संगीत वाद्य
सितारतार वाला भारतीय वाद्य
लाडलीअत्यंत प्रिय
मेहनत बेकार जानापरिश्रम व्यर्थ होना
जंजालझंझट, परेशानी
स्वबोधिनीस्वयं सीखने की पुस्तक
ग्रामोफोनपुराना संगीत बजाने वाला यंत्र
तालीमशिक्षा
दकियानूसीपुराने विचारों वाला
भुनभुनानाधीरे-धीरे शिकायत करना
मर्ज़बीमारी
नाश्ताअल्पाहार
चौकन्नासतर्क
मुखातिबआमने-सामने
तकल्लुफऔपचारिकता
हाज़िरउपस्थित
हैसियतआर्थिक या सामाजिक स्थिति
खामोशीचुप्पी
मंज़ूरस्वीकार
लताफ़तकोमलता, मधुरता
तसवीरचित्र
जिम्माउत्तरदायित्व
निगाहदृष्टि
निहायतअत्यंत
जनाबमहोदय
काबिलयोग्य
बहसवाद-विवाद
गृहस्थीघर-परिवार का कामकाज
रसीदप्राप्ति का प्रमाण
मुआयनानिरीक्षण
खिजाबबाल रंगने का रंग
दकियानूसीरूढ़िवादी
परवरिशपालन-पोषण
स्वभावप्रकृति
बनाव-श्रृंगारसजना-संवरना
एकांकी में प्रयुक्त मुहावरे एवं अर्थ 
मुहावराअर्थ
पसीना बहानामेहनत करना
मुँह फुलानानाराज़ होना
कानों में डाट लगनाबात न सुनना
दिमाग चढ़ानाअधिक महत्व देना
हाथ-पाँव फूलनाघबरा जाना
बात काटनाबीच में बोलना
मुँह लटकानाउदास होना
आँखें गड़ानाध्यानपूर्वक देखना
जान पर बन आनाबड़ी मुसीबत आना
रंग जमानाप्रभाव डालना
जाल में फँसनाचाल में आ जाना
मुँह पर ताला लगानाचुप रहना
आँखें बिछानास्वागत के लिए उत्सुक होना
पेट भरनासंतुष्ट होना
कान भरनाकिसी के विरुद्ध भड़काना
नाक में दम करनाबहुत परेशान करना
चुप्पी साध लेनामौन हो जाना
जी जान लगानापूरा प्रयास करना
हवा में उड़नाघमंड करना
आँखें चुरानासामना करने से बचना
टोक देनाबीच में रोकना
भेद खुलनारहस्य प्रकट होना
रंग में भंग पड़नाकाम में बाधा आना
आँखें फटी की फटी रह जानाबहुत आश्चर्यचकित होना
चौपट कर देनापूरी तरह बिगाड़ देना
बात उगल देनारहस्य बता देना
जान छुड़ानापीछा छुड़ाना
ध्याय में आए लोकोक्ति-सदृश कथन :
  1. "परमात्मा के यहाँ अक्ल बँट रही थी"
    → व्यंग्य में कहा गया कि व्यक्ति बुद्धिमान नहीं है।
  2. "मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं"
    → स्त्री-पुरुष में भेदभावपूर्ण सोच को दर्शाने वाला कथन।
  3. "खूबसूरती पर टैक्स"
    → सुंदरता को अत्यधिक महत्व देने वालों पर व्यंग्य।
  4. "आदमी तो भला है, मकान-वकान से हैसियत भी बुरी नहीं"
    → व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करना। 

परीक्षा हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण शब्द

दकियानूसी, तालीम, तकल्लुफ, हैसियत, लताफ़त, निहायत, मुखातिब, चौकन्ना, जंजाल, स्वबोधिनी, काबिल, परवरिश, खिजाब, निगाह, निहायत, मंज़ूर, रसीद, मुआयना, गृहस्थी, लाडली।

#CHAPTER DETAILS

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                                                             रीढ़ की हड्डी

                                                                     |

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                                    उमा           शंकर          गोपालप्रसाद         रामस्वरूप

                                       |                 |                        |                               |

                             आत्मसम्मान    कमजोरी     रूढ़िवादिता       दिखावटी आधुनिकता

उमाशंकर
साहसीडरपोक
आत्मसम्मानीदब्बू
स्वतंत्र विचारपिता पर निर्भर
प्रतीकअर्थ
रीढ़ की हड्डीसाहस और आत्मसम्मान
चश्माशिक्षा
सितारकला
विवाह वार्तासामाजिक मानसिकता