PADHNA LIKHNA

Gillu (गिल्लू)

#Detailed Summary

विस्तृत सारांश (Detailed Summary):

यह कहानी एक छोटी और घायल गिलहरी के बच्चे की है, जिसे लेखिका ने मरणासन्न स्थिति में पाया और उसका नाम 'गिल्लू' रखा।

1. गिल्लू का मिलना:
एक दिन लेखिका ने अपने बरामदे में देखा कि दो कौवे एक गमले के पास किसी छोटे जीव को नोच रहे हैं। पास जाकर देखा तो वह गिलहरी का एक छोटा सा बच्चा था जो गमले की संधि (कोने) में चिपका पड़ा था। लेखिका ने उसे कौवों से बचाया और उसके घाव साफ कर उन पर 'पेंसिलिन' का मरहम लगाया।

2. नया जीवन और शरारतें:
कुछ दिनों की सेवा के बाद गिल्लू स्वस्थ हो गया। उसकी चमकीली आँखें और झब्बेदार पूँछ सबको आकर्षित करती थी। लेखिका ने उसके लिए एक डलिया में रुई बिछाकर खिड़की पर लटका दिया, जो उसका घर बना। गिल्लू बहुत बुद्धिमान और चंचल था। वह लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए उनके पैरों के पास आकर सर्र से पर्दे पर चढ़ जाता और उतरता।

3. लेखिका के प्रति लगाव:
गिल्लू का लेखिका के प्रति गहरा प्रेम था। जब लेखिका भोजन करने बैठतीं, तो वह खिड़की से आकर उनकी थाली के पास बैठ जाता। वह बड़ी सफाई से चावल का एक-एक दाना खाता। उसका प्रिय खाद्य 'काजू' था। यदि उसे काजू न मिलता, तो वह दूसरी चीज़ें लेना बंद कर देता था।

4. वियोग और प्रतीक्षा:
एक बार लेखिका का मोटर दुर्घटना में घायल होने के कारण अस्पताल में रहना पड़ा। उन दिनों गिल्लू ने अपना प्रिय 'काजू' खाना भी कम कर दिया था। लेखिका के वापस आने पर वह उनके सिरहाने बैठकर अपने नन्हे पंजों से उनके बाल सहलाता, मानो कोई परिचारिका (Nurse) सेवा कर रही हो।

5. अंतिम समय:
गिलहरियों की जीवन अवधि लगभग दो वर्ष होती है। गिल्लू का अंत समय भी आ गया। उसने उस दिन कुछ नहीं खाया और न ही बाहर गया। रात भर वह लेखिका की उँगली पकड़कर चिपका रहा। सुबह की पहली किरण के साथ ही वह हमेशा के लिए सो गया। लेखिका ने उसे 'सोनजुही' की लता के नीचे समाधि दी क्योंकि उसे वह जगह बहुत पसंद थी और लेखिका को उम्मीद थी कि वह किसी दिन सोनजुही के पीले फूल के रूप में फिर से खिलेगा।