PADHNA LIKHNA

Raidas Ke Pad (रैदास के पद)

#Detailed Summary

विस्तृत सारांश (Detailed Summary):

इस पाठ में संत रैदास के दो पद संकलित हैं।

पद 1: अब कैसे छूटे राम नाम रट लागी...
इस पद में रैदास ने ईश्वर और भक्त के अटूट संबंध को विभिन्न प्रतीकों के माध्यम से समझाया है। वे कहते हैं कि उनके मन में राम नाम की जो रट लग गई है, वह अब छूट नहीं सकती। वे स्वयं को तुच्छ और ईश्वर को सर्वोपरि मानते हैं:
- यदि ईश्वर चंदन है, तो भक्त पानी है (जिसके अंग-अंग में चंदन की खुशबू बस गई है)।
- यदि ईश्वर बादल (घन) है, तो भक्त मोर है जो उसे देखकर नाचता है।
- यदि ईश्वर चाँद है, तो भक्त चकोर पक्षी है जो उसे टकटकी लगाकर देखता है।
- यदि ईश्वर दीपक है, तो भक्त उसकी बाती है जो रात-दिन जलती है।
- यदि ईश्वर मोती है, तो भक्त धागा है।
रैदास कहते हैं कि वे ईश्वर के ऐसे अनन्य दास (गुलाम) हैं जिनका अस्तित्व ईश्वर के बिना संभव नहीं है।

पद 2: ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै...
दूसरे पद में रैदास ने ईश्वर की कृपालुता और उदारता का वर्णन किया है। वे ईश्वर को 'गरीब निवाजु' (गरीबों पर दया करने वाला) कहते हैं।
- ईश्वर इतने महान हैं कि वे समाज के नीच और अछूत माने जाने वाले लोगों पर भी अपनी कृपा की छाया (छत्रु) रखते हैं।
- समाज जिन्हें छूने से डरता था (अछूत), उन पर ईश्वर ने दया दिखाई और उन्हें समाज में ऊँचा स्थान दिया।
- रैदास उदाहरण देते हैं कि नामदेव, कबीर, त्रिलोचन, सधना और सैनु जैसे संतों को ईश्वर ने ही तारा (मुक्ति दी)। ईश्वर की कृपा से ही रैदास जैसा 'नीच' समझे जाने वाला व्यक्ति भी निर्भय होकर भक्ति कर सकता है।